लोकसभा (Lok Sabha) में सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान (131वां) संशोधन बिल को सरकार पारित नहीं करा सकी। इस विधेयक में वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था। लंबे समय तक चली बहस और मतदान के बावजूद आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण यह बिल गिर गया। यह स्थिति सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण संसदीय घटनाक्रम के रूप में सामने आई है।
21 घंटे की बहस के बाद हुआ मतदान:
लोकसभा (Lok Sabha) में इस बिल पर करीब 21 घंटे तक विस्तृत चर्चा चली। इसके बाद हुए मतदान में कुल 528 सांसदों ने भाग लिया। इनमें से 298 सांसदों ने बिल के समर्थन में और 230 सांसदों ने विरोध में वोट दिया। बिल पारित होने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी, लेकिन आवश्यक संख्या से 54 वोट कम मिलने के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।
दो-तिहाई बहुमत की कमी बनी वजह:
संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य होता है। मतदान के आंकड़ों के अनुसार, सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल नहीं रही। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास कुल 293 सांसद थे, जबकि समर्थन में 298 वोट मिले, जिससे स्पष्ट है कि कुछ अतिरिक्त समर्थन मिला, लेकिन यह पर्याप्त नहीं रहा।
12 साल में पहली बार ऐसा हुआ:
पिछले 12 वर्षों के दौरान यह पहला अवसर माना जा रहा है, जब सरकार किसी विधेयक को लोकसभा (Lok Sabha) में पारित नहीं करा पाई। इस घटनाक्रम ने संसदीय प्रक्रिया और राजनीतिक समीकरणों पर नई चर्चा को जन्म दिया है।
महिला आरक्षण पर पड़ेगा प्रभाव:
इस विधेयक के पारित न होने का असर महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों पर भी पड़ेगा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा (Lok Sabha) और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की योजना है, लेकिन यह व्यवस्था अब नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू हो सकेगी। इससे 2029 के लोकसभा चुनाव में इसका लाभ मिलने की संभावना कम हो गई है।
दो अन्य विधेयकों पर नहीं हुई वोटिंग:
सरकार ने परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 को मतदान के लिए प्रस्तुत नहीं किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kirren Rijiju) ने कहा कि ये दोनों विधेयक पहले बिल से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन पर अलग से मतदान आवश्यक नहीं समझा गया।
परिसीमन प्रक्रिया का महत्व:
महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया जरूरी है। परिसीमन के तहत देश की जनसंख्या के आधार पर लोकसभा (Lok Sabha) और विधानसभा की सीटों की संख्या और सीमाएं तय की जाती हैं। इस प्रक्रिया के बाद ही यह निर्धारित होता है कि किन क्षेत्रों में आरक्षण लागू होगा।
ऐतिहासिक संदर्भ में महत्वपूर्ण घटना:
यह घटना संसदीय इतिहास में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले 2002 में आतंकवाद निरोधक विधेयक के बाद यह पहला मौका है, जब कोई सरकारी विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया। वहीं, 1990 के बाद यह पहला संविधान संशोधन विधेयक है, जो लोकसभा में पारित नहीं हो सका।
#LokSabha #ConstitutionAmendment #Parliament #WomenReservation #Politics
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।

