यूपी में सीटों के लिए JDU और LJP की दावेदारी, NDA से बात नहीं बनी तो अकेले उतरने की तैयारी
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार की दो प्रमुख पार्टियां जनता दल यूनाइटेड (JDU) और लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (LJP-R) अपनी तैयारियों को तेज कर रही हैं। दोनों दल संगठन स्तर पर उत्तर प्रदेश में विस्तार की कोशिश में जुटे हैं। जदयू ने जहां 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का दावा किया है, वहीं लोजपा-आर ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी की बात कही है। दोनों दल बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सहयोगी हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
लोजपा-आर के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) प्रयागराज में ‘यूथ बोले तो’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के बेटे निशांत कुमार (Nishant Kumar) वाराणसी का दो दिवसीय दौरा कर चुके हैं। जदयू ने 25 अक्टूबर को वाराणसी में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक भी बुलाई है, जिसमें उत्तर प्रदेश को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति सामने रखी जा सकती है।
यूपी में जदयू ने 60 सीटों पर तैयारी शुरू की:
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए जदयू ने बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार को प्रदेश प्रभारी बनाया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह पटेल के मुताबिक, प्रदेश प्रभारी की अगुआई में पार्टी 60 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इनमें पूर्वांचल के साथ मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटें भी शामिल हैं। यानी जदयू का फोकस केवल बिहार से सटे पूर्वांचल तक सीमित नहीं है।
जदयू की सक्रियता का अंदाजा निशांत कुमार के वाराणसी दौरे से भी लगाया जा रहा है। दो दिन के दौरे के दौरान उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दरबार में पूजा-अर्चना की और गंगा आरती में भी शामिल हुए। सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत में उन्होंने वाराणसी आने को अपना सौभाग्य बताया और कहा कि गुरुवादी बाबा उनके कुल के देवता हैं, इसलिए उन्होंने उनसे आशीर्वाद लिया।
25 अक्टूबर को वाराणसी में होगी बैठक:
जदयू ने 25 अक्टूबर को वाराणसी में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। इस बैठक में प्रदेश कार्यकारिणी का पुनर्गठन किया जाएगा। साथ ही पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश को लेकर अपना खाका पदाधिकारियों के सामने रखा जाएगा।
बैठक में सीटों के बंटवारे और गठबंधन को लेकर भी पार्टी अपना रुख स्पष्ट कर सकती है। जदयू का ध्यान वाराणसी, मिर्जापुर, जौनपुर, गाजीपुर और देवरिया जैसे पूर्वांचल के जिलों पर बताया गया है। इन क्षेत्रों में कुर्मी, पटेल और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं का प्रभाव माना जाता है।
पिछले चुनाव में जदयू का प्रदर्शन कमजोर रहा:
जदयू को उम्मीद है कि भाजपा और अपना दल (एस) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से अन्य पिछड़ा वर्ग के मतों का बिखराव रोका जा सकता है। बिहार में नीतीश कुमार का प्रमुख आधार कुर्मी और अति पिछड़ा वर्ग रहा है।
वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल के अनुसार किसी भी गठबंधन की ताकत उसके जनाधार से तय होती है। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश में जदयू के जनाधार का आकलन पिछले दो विधानसभा चुनावों के परिणामों से किया जा सकता है। वर्ष 2022 में जदयू ने 27 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन किसी भी सीट पर उसकी जमानत नहीं बच सकी थी। पार्टी को कुल 0.05 प्रतिशत वोट मिले थे।
लोजपा-आर भी यूपी में उतरने को तैयार:
भाजपा की बिहार में प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास ने भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। 6 जुलाई को लखनऊ (Lucknow) के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। इसमें चिराग पासवान शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
27 सितंबर को प्रयागराज (Prayagraj) में आयोजित ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम के दौरान भी चिराग पासवान ने इसी रुख को दोहराया। कार्यक्रम से लौटने के बाद दिल्ली में उन्होंने कहा कि प्रयागराज में उत्तर प्रदेश के युवाओं का मिला समर्थन उनके उस विश्वास को मजबूत करता है, जिसके साथ उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
403 सीटों पर तैयारी का दावा:
लोजपा-आर ने लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का दावा किया था। पार्टी के उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी अरुण भारती के अनुसार पार्टी की तैयारी पूरी है और प्रदेश में उसके दो बड़े आयोजन हो चुके हैं, जिनमें चिराग पासवान स्वयं शामिल हुए।
अरुण भारती ने कहा कि लोजपा-आर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है। यदि भाजपा की ओर से सम्मानजनक सीटों की पेशकश की जाती है तो पार्टी उस पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि बिहार में पार्टी का गठबंधन एनडीए के साथ है, जबकि दूसरे राज्यों में हर दल को अपना जनाधार बढ़ाने का अधिकार है।
भाजपा के सामने गठबंधन की सीटों की चुनौती:
वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह का मानना है कि उत्तर प्रदेश में जदयू और लोजपा-आर के साथ भाजपा का गठबंधन आसान नहीं होगा। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश में एनडीए के साथ पहले से चार क्षेत्रीय दल जुड़े हैं। इनमें राष्ट्रीय लोक दल की जाट समाज में, अपना दल (एस) की कुर्मी-कुशवाहा समाज में, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की राजभर समाज में और निषाद पार्टी की निषाद समाज में पकड़ बताई जाती है।
ऐसे में भाजपा के सामने मौजूदा सहयोगी दलों के बीच सीटों का बंटवारा करना पहले से ही चुनौती है। उनके अनुसार जदयू का बिहार में मुख्य मतदाता आधार कुर्मी-कुशवाहा समाज में है, जबकि उत्तर प्रदेश में अपना दल (एस) इसी सामाजिक आधार के बीच राजनीति करती है।
लोजपा-आर का बिहार में प्रमुख आधार पासवान समाज है। उत्तर प्रदेश में इस समाज का एक बड़ा हिस्सा पहले से भाजपा के साथ रहा है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में इस समाज के मतों के सपा की ओर जाने की बात कही गई थी। ऐसे में लोजपा-आर इस सामाजिक आधार को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर सकती है।
अलग चुनाव लड़ने पर बदल सकता है समीकरण:
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. संजय कुमार के मुताबिक चुनाव में छोटे दल भले ही ज्यादा सीटें न जीतें, लेकिन कुछ सीटों पर उनके प्रत्याशी हजार-दो हजार वोट हासिल करके परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। उनका कहना है कि कई बार बड़े दल अपने राजनीतिक हित के लिए छोटे दलों के प्रत्याशियों के जरिए मतों के बंटवारे का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
जदयू और लोजपा-आर दोनों बिहार में भाजपा की सहयोगी हैं और उत्तर प्रदेश में भी अपने सामाजिक आधार को साधने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में दोनों दल यदि अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं तो कुछ सीटों पर मतों के बंटवारे का असर पड़ सकता है। हालांकि, पिछले दो विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में दोनों दलों का प्रदर्शन मजबूत नहीं रहा है।
यूपी में पहले भी रहा है साथ:
वर्ष 2003 में जदयू में विलय से पहले समता पार्टी उत्तर प्रदेश में एनडीए गठबंधन के साथ चुनाव लड़ती थी। वर्ष 1996 में समता पार्टी को दो सीटें मिली थीं, जिनमें से एक पर उसे जीत मिली थी। वर्ष 1998 में पार्टी ने अपने हिस्से की दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी।
वर्ष 2003 में समता पार्टी का जदयू में विलय हो गया। हालांकि, समता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कभी हिस्सा नहीं लिया था।
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