उन्नाव (Unnao) में साधु राममिलन दास उर्फ बाबा मिलन दास सिंह की हत्या के मामले में वांछित मुख्य आरोपी इसराइल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस के अनुसार आरोपी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा था। सोमवार तड़के पुलिस और एसओजी (SOG) टीम ने उसे घेर लिया, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
तड़के हुई मुठभेड़ में आरोपी की मौत:
पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह ने बताया कि सोमवार सुबह लगभग 3:40 बजे सूचना मिली कि एक लाख रुपये का इनामी आरोपी इसराइल ताजपुर (Tajpur) अंडरपास के पास मौजूद है और किसी साथी का इंतजार कर रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस और एसओजी टीम ने तत्काल इलाके की घेराबंदी की।
पुलिस के अनुसार आरोपी को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान एसओजी के सिपाही विकास भदौरिया घायल हो गए, जबकि दरोगा न्यूटन कुमार सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट में गोली लगी, जिससे उनकी जान बच गई। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें इसराइल गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए बांगरमऊ सीएचसी (CHC) ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
आरोपी के पास से हथियार बरामद:
पुलिस ने बताया कि आरोपी के पास से 315 बोर का तमंचा, दो खोखा कारतूस और एक चाकू बरामद किया गया है। पुलिस का दावा है कि साधु राममिलन दास की हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी आरोपी के कब्जे से बरामद कर लिया गया।
दो दिन पहले घोषित हुआ था एक लाख का इनाम:
घटना के बाद से फरार चल रहे इसराइल पर पुलिस ने दो दिन पहले एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। मामले को लेकर क्षेत्र में लगातार तनाव बना हुआ था। रविवार को उन्नाव (Unnao) से सांसद साक्षी महाराज ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि आरोपी आत्मसमर्पण नहीं करेगा तो पुलिस कार्रवाई होना तय है।
हत्या के पीछे विवाद की बात:
साधु राममिलन दास के भाई ने दावा किया था कि बाबा मिलन दास निर्माणाधीन शिव मंदिर में लाउडस्पीकर लगाकर भजन-कीर्तन करते थे। आरोप है कि इसी बात को लेकर कुछ लोगों में नाराजगी थी और इसी विवाद ने बाद में गंभीर रूप ले लिया। परिजनों का आरोप है कि इसी कारण साधु की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई।
हालांकि, मामले की जांच और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा पुलिस जांच के अधीन है।
परिजनों ने बताया साजिश का हिस्सा:
इसराइल के मारे जाने के बाद साधु के भाई राजेंद्र सिंह ने कहा कि हत्या सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी। उनका आरोप है कि बाबा मंदिर निर्माण का कार्य करा रहे थे और वहां नियमित रूप से धार्मिक गतिविधियां आयोजित होती थीं। उन्होंने कहा कि बाकी आरोपियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं दूसरे भाई वीरेंद्र सिंह ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि मामले से जुड़े अन्य आरोपियों और कथित मास्टरमाइंड की भूमिका भी सामने लाई जानी चाहिए।
निर्माणाधीन मंदिर में करते थे पूजा-अर्चना:
बांगरमऊ (Bangarmau) थाना क्षेत्र के रामनगर निवासी बाबा मिलन दास पांच भाइयों में सबसे छोटे थे। वह अपने घर से करीब 500 मीटर दूर स्थित जमीन पर भगवान शिव का मंदिर बनवा रहे थे। पिछले लगभग पांच महीनों से मंदिर निर्माण का कार्य जारी था और वह नियमित रूप से वहां पूजा-अर्चना करते थे।
परिजनों के अनुसार मंदिर के आसपास धार्मिक गतिविधियां भी संचालित होती थीं। इसी दौरान विवाद की स्थिति पैदा होने की बात सामने आई है।
9 जून को हुई थी हत्या:
परिजनों और पुलिस के अनुसार 9 जून को बाबा मिलन दास को सभासद अतीक खां के अहाते में बुलाया गया था। आरोप है कि वहां इसराइल और उसके साथियों ने उन पर चाकुओं से हमला कर दिया। हमले में उनके शरीर पर कई गंभीर वार किए गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घायल अवस्था में बाबा मिलन दास ने बचने का प्रयास किया, लेकिन हमलावर लगातार उनका पीछा करते रहे। गंभीर रूप से घायल होने के बाद वह गिर पड़े। बाद में उन्हें बांगरमऊ स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
हत्या के बाद सड़क पर उतरे लोग:
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए थे। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किया और सड़क पर जाम लगा दिया। पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर स्थिति को नियंत्रित किया था।
बाद में पुलिस की मौजूदगी में साधु के शव को मंदिर के पास ही दफनाया गया था।
तीन आरोपी पहले ही हो चुके गिरफ्तार:
वीरेंद्र सिंह की शिकायत पर पुलिस ने पांच नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। नामजद आरोपियों में इसराइल, लल्ली उर्फ अजय गौतम, यामीन, शानू और मोहम्मद शफी शामिल थे।
पुलिस ने 11 जून को मोहम्मद शफी, लल्ली उर्फ अजय गौतम और यामीन को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस के अनुसार ये आरोपी भागने की तैयारी में थे। अब मुख्य आरोपी इसराइल भी मुठभेड़ में मारा जा चुका है, जबकि मामले की आगे की जांच जारी है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं:
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2013 में बोधेश्वर मंदिर (Bodheshwar Mandir) के सेवादार कल्लू पंडित की हत्या की घटना भी सामने आई थी, जिसमें बाबा राममिलन दास घायल हुए थे। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में पूर्व में भी संतों से जुड़ी हिंसक घटनाओं की चर्चा होती रही है।
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