गढ्ढे में फोर लेन, फोर लेन में गढ्ढा! सड़क बना लुट का अड्डा!

स्पेशल रिपोर्ट || इस तरह के आपको कई उदाहरण दे सकता हूं. जब टीवी न्यूज़ के मैटिनी शो के ज़रिए नफरत भरा जाता है.इसी नफरत को हाउसिंग सोसायटी के व्हाट्स एप ग्रुप और रिश्तेदारों के व्हाट्स एप ग्रुप में फैलाया जाता है. दिमाग में जहर इस कदर फ़ैल गई है कि जो चीज पसंद उसके गलत होने पर उसे सही साबित करने बेतुके और बेबुनियाद तरीके अपनाये जा रहे हैं. अग्निपथ योजना को लेकर कहा गया कि जो लड़के नुक्कड़ पर सिगरेट पीते हैं गुटका खाते हैं वो अब सही रास्ते पर जायेंगे. कम उम्र में तकनीक सीख जायेंगें, इन चतुर बुद्धिमानों की शिक्षा से व्हाट्स एप ग्रुप वाले अंकल ने खूब तालियाँ बजाई होंगी, खैर उन्हें भी टाइम पास करने के लिए अच्छा टॉपिक मिल गया, उनको क्या है उनका पेशन तो आ रहा है न?

खैर ऐसे लोग ऐसी किसी घटना का जिक्र नहीं करते जिसमे इनके पसंदीदा चीज़ की बेइज्जती हो. न सड़क पर होगी न उसके दुर्व्यवस्था पर. उत्तर प्रदेश में वाराणसी से गोरखपुर फोर लेन का निर्माण हुआ, टोल भी चालू हो गया, लेकिन उद्घाटन नहीं हुआ और सड़क धस गई. इतनी धस गई की, कोई गाड़ी उस गढ्ढे में से निचे गिरे तो बिना टिकट दिल्ली पहुँच जाये.

गाजीपुर जनपद के सैदपुर से होकर ये फोर लेन गुजरती है और इसी सड़क से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सैदपुर आये थे, बगल में ही उनका हैलीपैड बना था. इस फोर लेन को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट भी कहा जाता है. खैर देश के विकास के लिए प्रधानमंत्री के कई ड्रीम प्रोजेक्ट हैं. वैसे इस फोरे लेन में पूर्व सांसद मनोज सिन्हा का भी योगदान बताया जाता है. वो अब जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल हैं.

लेकिन ये सड़क धंसी कैसे? आवागमन शुरू होने के आठ माह बाद ही सड़क धंसनी शुरू हो गई है। पहली बार सड़क उसी स्थान पर धंसी है, जहां बीते 20 सितंबर 2021 को सीएम योगी आदित्यनाथ का उड़नखटोला उतरा था। संयोगवश आमजन की नजर पड़ गई और शिकायत पर कार्यदायी संस्था ने संबंधित लेन पर डिवाइडर लगाकर आवागमन रोक दिया, अन्यथा बड़ा हादसा हो जाता।

वाराणसी-गाजीपुर फोरलेन पर बीते अक्टूबर से वाहनों का आवागमन शुरू हुआ है। कैथी स्थित टोल प्लाजा पर सभी वाहनों से शुल्क वसूला जाता है, लेकिन सड़क की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया है जिसका जीता-जागता उदाहरण रविवार की रात सामने आया। सैदपुर क्षेत्र के शेखपुर ओवरब्रिज पर यह सड़क धंस गई है, जहां सड़क धंसी है वहां कंक्रीट उखड़ गए हैं और सरिया दिख रही है। रात भर क्षतिग्रस्त सड़क से आवागमन होता रहा, लेकिन संयोगवश कोई हादसा नहीं हुआ। सुबह आसपास के लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी सूचना दी तो उन्होंने कार्यदायी संस्था को सूचित किया।

कार्यदायी संस्था द्वारा गाजीपुर से वाराणसी जाते समय सैदपुर बाइपास के पास बाएं तरफ डिवाइडर लगाकर उस लेन पर आगवामन रोक दिया गया है और क्षतिग्रस्त स्थल को घेरा है। हालांकि सोमवार की शाम तक मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ था। खास यह है कि इसी स्थान पर दाएं तरफ सीएम योगी आदित्यनाथ का उड़नखटोला उतरा था और टाउन नेशनल इंटर कालेज में जनसभा को संबोधित करने के बाद इसी स्थान पर खड़े हेलीकाप्टर से सीएम वापस गए थे। सड़क धंसने से लोगों ने सड़क निर्माण के गुणवत्ता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

फोरलेन निर्माण के बाद जगह-जगह सड़क में दरारे पड़नी शुरू हो गई है। साथ ही जगह-जगह ओवरब्रिज के रेलिंगों में भी दरारे दिखाई पड़ रही हैं। कार्यदायी संस्था द्वारा सड़क में पड़ी दरारों को केमिकल के जरिये भरने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह नाकाफी लग रहा है। आमजन इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि टोल प्लाजा पर वाहनों से सख्तीपूर्वक शुल्क तो वसूला जा रहा है, लेकिन सड़क की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ये हाल तो फोर लेन का, ऐसी ही शिकायत गाजीपुर बारा मार्ग को लेकर आई थी. गाँव गाँव की ऐसी सडकें जिसे देखकर आप का इंजीनियरिंग पर से विश्वास उठ जायेगा. अब आप विचार कीजिये देश से धोखा कौन कर रहा है, बेरोजगारी और महंगाई से लड़ने वाला जवान और किसान या ये ठेकेदार और मोटी तनख्वा पाकर अपनी आँखे बंद रखने वाला सरकारी कर्मचारी?

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