रिपोर्टर: रजनीश कुमार मिश्र
बाराचवर क्षेत्र के आर एस कान्वेंट स्कूल (R S Convent School) परिसर में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) की ओर से हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुषों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का उद्देश्य सनातन परंपरा, सामाजिक एकता और राष्ट्रबोध के मूल विचारों को जन-जन तक पहुंचाना रहा। वक्ताओं ने कहा कि सनातन परंपरा में विविधता के बावजूद मूल भाव एकता और समरसता का है, जिसे समझना और आत्मसात करना समय की आवश्यकता है।

सनातन परंपरा सभी हिंदुओं को जोड़ती है:
मुख्य अतिथि आरएसएस के क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख मिथिलेश प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि वैदिक काल से लेकर आज तक सनातन को मानने वाले सभी हिंदू मूल रूप से एक हैं। कार्य, भाषा और जाति भले ही अलग-अलग हों, लेकिन सभी का जुड़ाव सनातन संस्कृति से है। उन्होंने कहा कि यही सांस्कृतिक सूत्र भारत को जोड़कर रखता है और यही हमारी पहचान भी है।
विविध विचारधाराओं में भी वैदिक मूल्यों की समानता:
मिथिलेश प्रसाद ने कहा कि सनातन परंपरा में अनेक विचारधाराएं विकसित हुईं। वैदिक विचारधारा से वैष्णव, शैव, शाक्य, बौद्ध, जैन और आर्य समाज जैसी धाराएं बनीं, लेकिन किसी भी विचारधारा ने वेदों या भारतीय जीवन मूल्यों का विरोध नहीं किया। वेद प्रेम, भाईचारे और मानवीय मूल्यों की शिक्षा देते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छुआछूत का वेदों में कहीं उल्लेख नहीं मिलता।

इतिहास में जाति व्यवस्था, पर छुआछूत नहीं:
उन्होंने रामायण काल और महाभारत काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय जातियां थीं, लेकिन छुआछूत जैसी सामाजिक विकृतियां नहीं थीं। समाज में कर्म, चिंतन और आचरण को महत्व दिया जाता था। उन्होंने बताया कि अनेक महर्षि ऐसे हुए जो शूद्र कुल से थे, फिर भी अपने ज्ञान, तप और विचारों के कारण समाज में पूजनीय बने।
कर्म और चिंतन से महात्मा बने ऋषि:
अपने वक्तव्य में उन्होंने महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण देते हुए कहा कि शूद्र जाति से आने वाले वाल्मीकि ने भगवान राम के जीवन पर रामायण जैसा महान ग्रंथ लिखा, जिसे आज पूरी दुनिया मानती है। यह उदाहरण दर्शाता है कि सनातन परंपरा में जन्म नहीं, बल्कि कर्म और विचार को श्रेष्ठता का आधार माना गया है।
आधुनिक समाज में बढ़ता विभाजन चिंता का विषय:
मिथिलेश प्रसाद ने कहा कि आज समाज जाति, रंग और ऊंच-नीच के भेद में बंटता जा रहा है। इसी कमजोरी का लाभ उठाकर मुगल काल से लेकर अंग्रेजों तक विदेशी शक्तियों ने भारत पर शासन किया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के इसी असंगठन को देखते हुए डॉक्टर हेडगेवार ने वर्ष 1925 में संघ की स्थापना की थी। उनका स्पष्ट विचार था कि जब हिंदू समाज संगठित होगा, तभी भारत विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा।
संगठन और राष्ट्र के लिए कार्य करने की अपील:
उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित लोगों से अपील की कि जाति-पात और ऊंच-नीच के भाव को त्यागकर आपसी संगठन को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि मां भारती और राष्ट्र के लिए एकजुट होकर कार्य करना ही सच्चा राष्ट्रधर्म है। संघ इसी उद्देश्य को लेकर समाज के बीच कार्य कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।
दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण से हुई शुरुआत:
कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती के चित्र पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इसके बाद विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान देवेंद्र जी महाराज, दूधनाथ राम और सविता देवी सहित अन्य वक्ताओं ने भी समाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए।
संचालन और आभार प्रदर्शन:
कार्यक्रम का संचालन सह खंड कार्यवाह रितेश ने किया। सम्मेलन के अंत में यशवंत सिंह ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्था बनी रही, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सार्थक वातावरण में संपन्न हुआ।
बड़ी संख्या में गणमान्य लोग रहे मौजूद:
इस अवसर पर कृपाशंकर सिंह, खंड कार्यवाह प्रवीण राय, रामनारायण राय, राजेंद्र राय, दिनेश सिंह, श्यामराज तिवारी, भीष्म देव सिंह, विपिन बिहारी सिंह, देवेंद्र सिंह देवा, आशुतोष सिंह दीपक, नथुनी सिंह, प्रधानाचार्य मृत्युंजय पाण्डेय, प्रधानाचार्य जितेंद्र यादव, प्रधानाचार्य अमरनाथ यादव, प्रसून सिंह भोला, महेंद्र सिंह, भोला सिंह गांधी जी, विजयनारायण शर्मा, शिवजी सिंह, ब्लॉक प्रमुख ब्रजेंद्र सिंह, जिला पंचायत सदस्य राजकुमार सिंह झाबर, वीरेंद्रनाथ राय, दीपक उपाध्याय, हिमांशु राय, आलोक पाण्डेय, शिवप्रताप सिंह छोटू, संतोष गुप्ता, डॉ गिरिजाशंकर पाण्डेय, रितेश गुप्ता, दूधनाथ राम, पूर्व प्रधान राघवेंद्र उर्फ लालू, अवधेश चौहान, सविता देवी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और समापन:
सम्मेलन की अध्यक्षता देवानंद सरकार ने की, जबकि संचालन विपिन कुमार ने किया। अंत में स्कूल के प्रबंधक यशवंत सिंह ने हिंदू सम्मेलन में आए सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सहयोग करने वालों की सराहना की।
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