संविधान दिवस पर छात्रों और शिक्षकों ने ली शपथ, निकाली जागरूकता रैली

बाराबंकी (Barabanki) के मदरसा मिस्बाहुल उलूम देवा शरीफ (Madrasa Misbahul Uloom, Deva Sharif) में 26 नवंबर, 2025 को संविधान दिवस (Constitution Day) बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समस्त शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और छात्र-छात्राओं ने संविधान की प्रस्तावना पढ़कर शपथ ली। तत्पश्चात नगर पंचायत देवा शरीफ (Deva Sharif, Nagar Panchayat) में छात्रों ने हर्षोल्लास के साथ संविधान एवं नागरिक अधिकारों के महत्व पर जोर देते हुए रैली निकाली।

छात्र संविधान दिवस पर रैली के दौरान एक बैनर पकड़े हुए, जिसमें 26 नवंबर संविधान दिवस का उल्लेख है।

संविधान की प्रस्तावना के साथ शपथ कार्यक्रम:
मदरसा के प्रधानाचार्य मोहम्मद वाजिद सिद्दीकी (Mohammad Wajid Siddiqui) के नेतृत्व में शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और इसे आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस दौरान छात्रों ने संविधान के प्रति सम्मान और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता व्यक्त की। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि संविधान केवल कागज पर नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन में मार्गदर्शक सिद्ध होना चाहिए।

जागरूकता रैली और नारेबाजी:
शपथ ग्रहण के बाद नगर पंचायत देवा शरीफ (Deva Sharif, Nagar Panchayat) में छात्रों द्वारा रैली निकाली गई। इस रैली में नारे लगाए गए, जैसे—“संविधान हमारी शान है, एकता की पहचान है”, “भारत का संविधान जिंदाबाद जिंदाबाद”, “अपने अधिकारों को जानिए, संविधान को पहचानिए”, “मिशन शक्ति जिंदाबाद”, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, और “भर लो SIR, हासिल करो वोट का अधिकार।”
रैली के दौरान छात्रों ने यह संदेश भी दिया कि मिशन शक्ति और SIR गणना प्रपत्र को 04 दिसंबर, 2025 से पूर्व जमा करना आवश्यक है। इस अभियान का उद्देश्य छात्रों और नागरिकों को अपने अधिकारों और मतदाता पहचान पत्र के महत्व के प्रति जागरूक करना था।

प्रधानाचार्य का संदेश:
प्रधानाचार्य मोहम्मद वाजिद सिद्दीकी (Mohammad Wajid Siddiqui) ने बताया कि संविधान दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छात्रों और नागरिकों के लिए जिम्मेदारी और अधिकार की याद दिलाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि बच्चों में लोकतंत्र और संविधान के प्रति सम्मान की भावना पैदा करना आज के समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

शिक्षा और नागरिक जागरूकता पर जोर:
इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं हैं, बल्कि नागरिकता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने का माध्यम भी हैं। छात्रों को यह सिखाया गया कि अपने अधिकारों को जानना और उनका प्रयोग करना हर नागरिक का कर्तव्य है।

सामाजिक और स्थानीय प्रभाव:
बाराबंकी (Barabanki) के नागरिकों और छात्रों ने इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी दिखाई। कार्यक्रम ने बच्चों और युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान और अधिकारों के प्रति उत्साह बढ़ाया। नगर पंचायत और मदरसा प्रशासन का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता फैलाने और विद्यार्थियों में जिम्मेदारी की भावना पैदा करने में सहायक हैं।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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