गाजीपुर (Ghazipur) जनपद के मुहम्मदाबाद (Muhammadabad) तहसील अंतर्गत भांवरकोल (Bhāwarakol) विकासखंड के ग्राम महेशपुर द्वितीय में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Ration Distribution System) को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। यहां राशन कार्ड से जुड़े कथित घोटाले और फर्जीवाड़े के आरोपों ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना दिया है। मामले में कार्रवाई न होने से पीड़ित ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
राशन कार्ड में गड़बड़ी का आरोप:
गांव निवासी शिवशंकर सिंह यादव (Shivshankar Singh Yadav) ने कोटेदार रामजी सिंह यादव (Ramji Singh Yadav) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि राशन कार्ड में हेराफेरी कर वर्षों से अवैध तरीके से राशन उठाया जा रहा है। इसके साथ ही अवैध वसूली किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ गया है।
पूर्व शिकायत और जांच की स्थिति:
पीड़ित द्वारा इस मामले की शिकायत पहले उपजिलाधिकारी मुहम्मदाबाद (SDM Muhammadabad) से की गई थी। शिकायत के बाद हुई प्रारंभिक जांच में कोटेदार को दोषी पाया गया था और उसे एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश भी दिया गया था। हालांकि, कई महीनों का समय बीत जाने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे पीड़ित पक्ष में नाराजगी बनी हुई है।
फर्जी दस्तावेज और नाम परिवर्तन का आरोप:
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कोटेदार ने फर्जी कुटुंब रजिस्टर की नकल तैयार कर उसके पुत्र का नाम अपने राशन कार्ड में दर्ज करा लिया। वहीं, शिकायतकर्ता की बहू का नाम किसी अन्य परिवार के राशन कार्ड में जोड़ दिया गया। इस कथित हेराफेरी के माध्यम से लगभग पांच वर्षों से गलत तरीके से राशन का लाभ उठाया जा रहा है।
अवैध वसूली और मृत व्यक्तियों के नाम का उपयोग:
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि राशन कार्ड निरस्त कर नया कार्ड बनवाने के नाम पर उससे 1600 रुपये की अवैध वसूली की गई। इसके अलावा कोटेदार पर यह भी आरोप है कि उसने अपने राशन कार्ड में कई मृत व्यक्तियों के नाम दर्ज कर सरकारी लाभ लिया है, जो गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है।
जिलाधिकारी और DSO से न्याय की गुहार:
मामले से आहत शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी (DM – District Magistrate) और जिला पूर्ति अधिकारी (DSO – District Supply Officer) को पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, उन्होंने अपने परिवार के लिए नया राशन कार्ड तत्काल जारी करने की भी अपील की है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें:
इस पूरे मामले में अब प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। जांच के बावजूद कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में असंतोष है। पूरे क्षेत्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इस मामले में कब और किस प्रकार की कार्रवाई करता है। यह प्रकरण सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
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