SIR पर दयाशंकर सिंह का विपक्ष पर तीखा कटाक्ष


रिपोर्टर: अमित कुमार

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के परिवहन मंत्री और बलिया (Ballia) सदर विधायक दयाशंकर सिंह (Dayashankar Singh) ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) द्वारा एसआईआर (SIR) के दौरान कर्मचारियों की मौत पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है और पहले भी यह होता रहा है। 2003 में भी मतदाता सूची का गहन परीक्षण और शुद्धिकरण किया गया था।

एसआईआर प्रक्रिया का ऐतिहासिक महत्व:
दयाशंकर सिंह (Dayashankar Singh) ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग (Election Commission) समय-समय पर मतदाता सूची (Voter List) का परीक्षण और शुद्धिकरण करता है। उनका कहना था कि एसआईआर के कारण उन लोगों को परेशानी हो रही है जिनके पास कई जगह मतदाता सूची में नाम दर्ज हैं। उन्होंने दावा किया कि कोई भी विधानसभा क्षेत्र ऐसा नहीं बचेगा जहां 35 से 40 हजार वोटर कम न हो जाएँ।

विपक्ष पर कटाक्ष:
विधायक ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि एसआईआर से शुद्धिकरण हो रहा है, जिसके कारण उन लोगों को परेशानी हो रही है जिनके फर्जी वोट हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर के माध्यम से उन लोगों के नाम हटाए जाएंगे जो कहीं और शिफ्ट हो गए हैं, जो मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं और जिनके नाम कई जगहों पर दर्ज हैं। अब मतदाता केवल एक ही स्थान पर दर्ज होंगे।

सपा विधायक पलवी पटेल के बयान पर प्रतिक्रिया:
दयाशंकर सिंह (Dayashankar Singh) ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की विधायक पलवी पटेल (Palvi Patel) के एसआईआर फार्म न भरने के बयान पर कहा कि यदि कोई मतदाता फार्म नहीं भरता तो उसका नाम मतदाता सूची (Voter List) से कट जाएगा और वह न वोट डाल सकेगा न चुनाव लड़ सकेगा। उन्होंने कहा कि एसआईआर लोकतंत्र (Democracy) और चुनाव आयोग (Election Commission) की प्रक्रिया है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।

एसआईआर का उद्देश्य और लोकतंत्र में महत्व:
उन्होंने बताया कि एसआईआर (Special Intensive Revision) का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को सही और शुद्ध बनाना है। यह सुनिश्चित करता है कि केवल वास्तविक मतदाता ही मतदान करें। इससे मतदाता सूची में गड़बड़ी और फर्जी वोट की संभावना समाप्त होती है।

निष्कर्ष:
बलिया (Ballia) के विधायक दयाशंकर सिंह (Dayashankar Singh) का कहना है कि एसआईआर का विरोध केवल राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से लोकतंत्र मजबूत होता है और फर्जी वोटिंग रोकने में मदद मिलती है।


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