यूपी राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDC [Uttar Pradesh State Industrial Development Authority]) और आयुष (AYUSH [Department of Ayurveda, Yoga & Naturopathy, Unani, Siddha and Homeopathy]) विभाग में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। CAG (Controller and Auditor General [India]) की रिपोर्ट के अनुसार, यूपीसीडा ने नियमों की अनदेखी करते हुए उद्योगों के लिए जमीन आवंटित की और आयुष विभाग ने दवा खरीद में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
CAG रिपोर्ट में बड़े खुलासे:
CAG ने बताया कि यूपीसीडा ने 2017-18 से मार्च 2024 तक सिर्फ 39 फीसदी जमीन का आवंटन किया। 5263 एकड़ में से केवल 2052 एकड़ भूमि ही अधिग्रहीत हो सकी। आवंटियों से कुल 6714.4 करोड़ रुपए वसूलने थे, लेकिन केवल 4185.06 करोड़ रुपए ही वसूले जा सके। फर्जी दस्तावेजों और बोली क्षमता की जांच न करने के कारण 27 कॉन्ट्रैक्ट बॉन्ड 1 करोड़ से 63.41 करोड़ रुपए तक के जारी किए गए। 11 काम 61 से 2612 दिन की देरी से पूरे हुए और 14 काम मार्च 2024 तक अधूरे थे।
आयुष विभाग में गड़बड़ी:
राज्य आयुष सोसायटी ने दवा कंपनियों पर इतना भरोसा जताया कि सैंपल जांच के बिना ही दवा खरीद को मंजूरी दी गई। इससे रोगियों और अस्पतालों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग गया। CAG ने आयुष विभाग को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में सभी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नियमों का पालन किया जाए।
इन्वेस्टर्स समिट के बाद भी जमीन अधिग्रहण में कमी:
सरकार ने फरवरी 2018 में इन्वेस्टर्स समिट आयोजित किया था, जिसमें 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के एमओयू साइन किए गए थे। फरवरी 2022 में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देशी-विदेशी कंपनियों और औद्योगिक समूहों ने 33.50 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए। लेकिन जमीन की उपलब्धता में कमी और स्थानीय विरोध के कारण उद्योग लगाने में बाधा आई।
कम आय वाली कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट की जमीन:
CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कोसी कोटवन-2 में 300 करोड़ रुपए की परियोजना के लिए केवल 1.04 लाख रुपए की नेटवर्थ वाली कंपनी को जमीन दे दी गई। कोसी कोटवन एक्सटेंशन-1 में भी कम आय वाली कंपनियों को 40-41 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट के नाम पर भूखंड आवंटित किए गए। समय पर पैसा जमा न करने के बावजूद, 864 दिन बाद जुर्माना लेकर मामला चलाया गया।
IRCTC को नजरअंदाज कर अपात्र कंपनी को आवंटन:
जौनपुर औद्योगिक क्षेत्र में 5018 वर्गमीटर का भूखंड आवंटन अपात्र कंपनी मेसर्स जय भगवती ट्रेडर्स को दिया गया। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड (IRCTC [Indian Railway Catering and Tourism Corporation Limited]) का आवेदन नजरअंदाज कर दिया गया। भूखंड आवंटन के लिए बनी पीईसी ने दोनों पक्षों के आंकड़ों पर विचार किए बिना निर्णय लिया।
आर्थिक नुकसान और टैक्स नुकसान:
CAG ने रिपोर्ट में यह भी बताया कि इनकम टैक्स छूट नहीं लेने के कारण 184.43 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आयकर जमा करना पड़ा। साथ ही, राज्य के दो सार्वजनिक उपकरणों को ऋण समझौते के बिना 52.84 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया।
सरकार और अधिकारियों को सुधार की नसीहत:
CAG ने यूपीसीडा और आयुष विभाग को कामकाज में सुधार करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की सख्त नसीहत दी है। रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेज, अनुचित आवंटन और अनियमित प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी दी गई है।
भविष्य में सुधार की जरूरत:
इन्वेस्टर्स समिट और आर्थिक विकास के महत्व को देखते हुए, निवेशकों को उद्योग लगाने के लिए भूमि की समय पर उपलब्धता जरूरी है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
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