जहां पूरी दुनिया में नया साल 1 जनवरी को मनाया जाता है, वहीं हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है। इस साल यह 19 मार्च 2026 को पड़ रही है। इस अवसर पर नव संवत्सर 2083 शुरू होगा। धार्मिक और पंचांग के हिसाब से यह संवत्सर काफी खास माना जा रहा है, क्योंकि इस बार विक्रम संवत में 12 नहीं, 13 महीने होंगे।
नव संवत्सर 2083 कब शुरू होगा:
बीएचयू (BHU) के एस्ट्रोलॉजर प्रोफेसर विनय पांडे के अनुसार, विक्रम संवत 2083 की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होगी। यह गुरुवार, 19 मार्च 2026 को पड़ रही है। इसी दिन देश के विभिन्न हिस्सों में गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa) और उगादी (Ugadi) का पर्व मनाया जाएगा। इसके साथ ही चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) भी शुरू होगी, जो इस बार 19 मार्च से 27 मार्च तक चलेगी।
विक्रम संवत 2083 क्यों खास है:
प्रो. विनय पांडे के अनुसार, विक्रम संवत 2083 इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि इस साल हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जुड़ रहा है। इस महीने को अधिक मास (Adhik Maas) या मलमास/पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। भारतीय कालगणना प्रणाली में महीने चंद्रमा के आधार पर चलते हैं, जबकि वर्ष का गणना सौर मान पर होती है। सौर और चंद्र मान के सामंजस्य के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। यही कारण है कि विक्रम संवत 2083 धार्मिक और पंचांग दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिक मास कब होगा:
गोरखपुर (Gorakhpur) के एस्ट्रोलॉजर नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस वर्ष अधिक मास ज्येष्ठ (Jyeshtha) महीने में आएगा। यह 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। इस साल ज्येष्ठ माह 2 बार आएगा। पहले 15 दिन सामान्य ज्येष्ठ मास होंगे, उसके बाद 30 दिन अधिक मास, और फिर अंत के 15 दिन सामान्य मास होंगे। अधिक मास आने के कारण व्रत और त्योहारों की तिथियां 15 से 20 दिन आगे खिसक सकती हैं।
इस साल किस ग्रह का प्रभाव रहेगा:
विक्रम संवत 2083 में गुरु (बृहस्पति) ग्रह का प्रभाव सबसे अधिक रहेगा। गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, नीति और विस्तार का कारक माना जाता है। नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, गुरु के प्रभाव से लोगों का झुकाव धार्मिक, आध्यात्मिक और सीखने-सिखाने वाले कामों की ओर बढ़ सकता है। शिक्षा, सलाह-मशविरा, न्याय और सोच-समझकर लिए जाने वाले फैसलों में धैर्य और संतुलन दिखाई देगा।
धार्मिक और व्यक्तिगत जीवन पर असर:
गुरु ग्रह के प्रभाव और अधिक मास के कारण लोग आत्मचिंतन, सुधार और आध्यात्मिक साधना पर अधिक ध्यान देंगे। इस साल लोग जल्दी निर्णय लेने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाने की प्रवृत्ति दिखाएंगे। इससे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में संतुलन और समझदारी बढ़ सकती है।
त्योहार और व्रत पर असर:
अधिक मास के कारण चैत्र मास और ज्येष्ठ मास में आने वाले व्रत और पर्वों की तारीखें प्रभावित होंगी। लोग अपने धार्मिक और पारिवारिक कार्यक्रमों को नए कैलेंडर के अनुसार समायोजित करेंगे। धार्मिक आयोजनों में गुरु के प्रभाव से पूजा-पाठ, जप और ज्ञान संबंधी गतिविधियों की महत्ता बढ़ जाएगी।
निष्कर्ष:
विक्रम संवत 2083 का नव संवत्सर 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो रहा है। 13 महीनों वाला यह संवत धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। गुरु ग्रह के प्रभाव और अधिक मास के कारण लोगों का रुझान धर्म, शिक्षा और आध्यात्मिकता की ओर अधिक रहेगा। यह वर्ष जीवन में सोच-समझकर निर्णय लेने और आत्म-निर्माण का अवसर भी प्रदान करेगा।
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