लखनऊ (Lucknow) स्थित यूपी प्रेस क्लब (UP Press Club) में वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय शीतला सिंह की तीसरी पुण्यतिथि पर संगोष्ठी एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक वरिष्ठ लोगों ने भाग लेकर शीतला सिंह को याद किया। वक्ताओं ने उन्हें निष्पक्ष, निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का मजबूत स्तंभ बताते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।

जनमोर्चा (Janmorcha) की ओर से आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी और साहित्यकार मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पत्रकारिता के वर्तमान दौर, सामाजिक जिम्मेदारियों और शीतला सिंह के सिद्धांतों पर विस्तार से अपने विचार रखे।
पत्रकारिता में सत्य और निष्पक्षता के प्रतीक:
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति डी.पी. सिंह ने कहा कि शीतला सिंह वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष पत्रकारिता के पर्याय थे। उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन के समय देश और विदेश से आने वाले मीडिया संस्थान भी तथ्यों और प्रमाणिक जानकारी के लिए शीतला सिंह का मार्गदर्शन लेते थे। उस दौर में शासन और प्रशासन भी जटिल मामलों में उनकी राय को गंभीरता से सुनता था।
उन्होंने कहा कि शीतला सिंह ने हमेशा जनहित के मुद्दों को प्रमुखता दी और सत्ता से सवाल पूछने की परंपरा को मजबूत किया। पत्रकारिता में सत्य और सामाजिक जिम्मेदारी को उन्होंने अपने कार्य का आधार बनाया। न्यायमूर्ति डी.पी. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारिता को तथ्यहीनता और पूर्वाग्रह से बचाना सबसे बड़ी आवश्यकता है।
पत्रकारिता को नई दिशा देने वाला व्यक्तित्व:
यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन (UP Working Journalist Union) के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने शीतला सिंह को पत्रकारिता जगत का आइकॉन बताया। उन्होंने कहा कि उनके विचार और कार्यशैली आज भी पत्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
यूपी प्रेस क्लब के अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने कहा कि शीतला सिंह पत्रकारिता के इनसाइक्लोपीडिया थे। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रीय स्तर के कई राजनेता समय-समय पर उनसे सलाह लेते थे। अयोध्या और रामजन्मभूमि से जुड़े विषयों पर उनकी राय को देश-विदेश के पत्रकार भी गंभीरता से सुनते थे।
सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया:
यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के मंडल लखनऊ अध्यक्ष शिवशरण सिंह ने कहा कि शीतला सिंह ने जनमोर्चा कोऑपरेटिव सोसायटी के माध्यम से पत्रकारों के सहयोग और संरक्षण का उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
वरिष्ठ पत्रकार नावेद शिकोह ने कहा कि शीतला सिंह स्वयं पत्रकारिता का एक विश्वविद्यालय थे। वहीं भारत सिंह ने कहा कि अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में छात्र जनमोर्चा की संपादकीय पढ़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी किया करते थे। इससे उनकी लेखनी के प्रभाव और विश्वसनीयता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पत्रकारिता में वैचारिक योगदान को किया याद:
वरिष्ठ पत्रकार अनिल त्रिपाठी ने शीतला सिंह को कलम का सिपाही बताते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के बिना पत्रकारिता में सुधार संभव नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार ने कहा कि सहकारिता आधारित पत्रकारिता को नई दिशा देने में शीतला सिंह का योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह ने कहा कि रामजन्मभूमि विषय पर उनकी लेखनी एक विश्वसनीय दस्तावेज और ज्ञानकोश की तरह थी। उन्होंने जनमोर्चा के माध्यम से पत्रकारिता में वैचारिक क्रांति का कार्य किया।
पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह ने कहा कि बचपन से ही जनमोर्चा की संपादकीय उन्हें प्रभावित करती रही है। वरिष्ठ पत्रकार भास्कर दुबे ने कहा कि गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने वालों में शीतला सिंह का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा।
68 वर्षों की यात्रा का भी उल्लेख:
जनमोर्चा के संपादक राम कुमार ने कहा कि उन्होंने शीतला सिंह के नेतृत्व में पत्रकारिता के मूल संस्कार सीखे। जनमोर्चा की प्रधान संपादक सुमन गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1958 में बाबा हरदेव सिंह और शीतला सिंह ने जनमोर्चा की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आज अपने 68 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी कर चुका है।
कार्यक्रम में बाबा हरदेव सिंह, डॉ. कौशिक, पूर्व विधान परिषद सदस्य दीपक सिंह, आईएफडब्लूजे (IFWJ) के राष्ट्रीय सचिव विश्वदेवराव, अनिल पांडे सहित कई वरिष्ठ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
सैकड़ों पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि:
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार शिव विजय सिंह, पवन सिंह, अनिल कुमार सैनी, टी.एन. शर्मा, अविनाश शुक्ला और नितिन श्रीवास्तव सहित प्रदेशभर से आए पत्रकारों, संपादकों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने भाग लेकर शीतला सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन प्रेमकांत तिवारी ने किया।
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