सहारा की 88 संपत्तियों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सहारा–अडानी प्रॉपर्टीज डील पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दायर उस याचिका पर आज सुनवाई प्रस्तावित थी, जिसमें कंपनी ने अपनी 88 संपत्तियों, जिनमें महाराष्ट्र स्थित एंबी वैली और लखनऊ का सहारा शहर शामिल हैं, को अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को बेचने की अनुमति मांगी है।

केंद्र सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय

इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की बेंच ने अनुरोध स्वीकार करते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी।

अब यह मामला छह सप्ताह बाद फिर से सूचीबद्ध किया जाएगा।

कर्मचारियों के लंबित वेतन वाली याचिकाएं भी स्थगित

सहारा समूह के कर्मचारियों द्वारा लंबित वेतन भुगतान की मांग संबंधी आवेदन भी आज सूचीबद्ध थे, लेकिन इन पर भी कोई आदेश पारित नहीं हुआ। अदालत ने इन्हें भी अगली तारीख पर सुनने का फैसला किया।

सहारा की ओर से पेश हुए कपिल सिब्बल

सहारा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल ने यह भी आग्रह किया कि इस पूरे प्रकरण में सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) को पक्षकार बनाया जाए, क्योंकि कई सहकारी समितियों के हित भी इन संपत्तियों से जुड़े हुए हैं।

अमाइकस क्यूरी का दावा—सहारा ने कई संपत्तियों का विवरण नहीं दिया

इस केस में अदालत द्वारा नियुक्त अमाइकस क्यूरी शेखर नाफडे ने कोर्ट को बताया कि उन्हें कई ऐसी संपत्तियों के दावे मिले हैं, जिनका खुलासा सहारा समूह ने अब तक कोर्ट के समक्ष नहीं किया है। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि कंपनी को सभी संपत्तियों का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का निर्देश दिया जाए।

अदालत ने आज नहीं दिया कोई निर्देश

हालांकि अमाइकस की इस मांग पर अदालत ने आज कोई आदेश पारित नहीं किया। कोर्ट ने केवल केंद्र द्वारा मांगे गए समय को स्वीकार करते हुए सभी मामलों की सुनवाई आगे बढ़ा दी।

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यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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