कोलकाता। सहारा इंडिया परिवार से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सहारा इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सहारा मीडिया के वेंचर राष्ट्रीय सहारा अखबार के लखनऊ यूनिट के विशेष हेड रहे वी.एस. डोगरा (विजय सिंह डोगरा) ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। बताया जा रहा है कि यह इस्तीफा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सरकारी गवाह बनने की दिशा में उठाया गया कदम है। डोगरा का नाम सहारा इंडिया परिवार के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रमुख अभियुक्तों में सामने आने के बाद से ही मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ था।
ED जांच और इस्तीफे की पृष्ठभूमि:
जानकारी के अनुसार, वी.एस. डोगरा ने यह त्यागपत्र ऐसे समय में दिया है जब ईडी की जांच तेज हो चुकी है। करीब एक माह पूर्व डोगरा की ओर से यह बात फैलवाई गई थी कि ईडी की कोलकाता टीम ने उन्हें गोमतीनगर, लखनऊ स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, यह चर्चा बाद में अफवाह साबित हुई। सहारा इंडिया परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि डोगरा के पास देश और विदेश में लगभग 1000 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसकी जानकारी लंबे समय से जांच एजेंसियों के पास मौजूद थी।
लखनऊ और आसपास फैली संपत्तियां:
वी.एस. डोगरा की संपत्तियों को लेकर कई जानकारियां सामने आती रही हैं। लखनऊ के सरोजिनी नगर क्षेत्र के बेंती गांव में कथित रूप से सरकारी जमीन पर कब्जे के साथ उनका एक विशाल फार्म हाउस बताया जाता है। इसके अलावा लखनऊ शहर में उनके कई आवास और निजी व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हैं। इन संपत्तियों का विवरण बीते वर्ष सहारा इंडिया से सेवानिवृत्त एक कर्मचारी द्वारा विभिन्न जांच एजेंसियों के साथ-साथ सहारा इंडिया परिवार के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजा गया था। माना जा रहा है कि इन्हीं सूचनाओं के आधार पर ईडी ने संपत्तियों की गहन जांच शुरू की थी।
निवेशकों के धन से संपत्ति का आरोप:
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि डोगरा की कथित संपत्तियां निवेशकों द्वारा जमा की गई राशि के दुरुपयोग से बनाई गई हैं। ईडी द्वारा जब इस पहलू का परीक्षण किया गया और आरोपों की पुष्टि हुई, तब कार्रवाई को और तेज किया गया। इसी प्रक्रिया के बीच वी.एस. डोगरा द्वारा पद से इस्तीफा देना जांच को एक नए मोड़ पर ले जाता है।
चपरासी से एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर तक का सफर:
वी.एस. डोगरा का सहारा इंडिया परिवार में सफर काफी चर्चा में रहा है। उनकी नियुक्ति शुरुआत में एक चपरासी के पद पर हुई थी। सहारा इंडिया परिवार के तत्कालीन अध्यक्ष सुब्रत राय की नजर डोगरा पर पड़ी और इसके बाद उन्हें अध्यक्ष के कार्यालय में तैनात किया गया। धीरे-धीरे डोगरा अध्यक्ष के भरोसेमंद बनते चले गए और सचिव, निदेशक, प्रमुख निजी सचिव होते हुए एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर तक पहुंच गए।
सुब्रत राय के सबसे करीबी लोगों में गिनती:
सहारा इंडिया परिवार से जुड़े वरिष्ठ लोगों के अनुसार, सुब्रत राय की दिनचर्या से लेकर उनकी बैठकों तक में वी.एस. डोगरा की अहम भूमिका रहती थी। किससे मिलना है, किसे नहीं मिलना है, किस फाइल पर हस्ताक्षर होने हैं और किसे रोका जाना है, यह सब कुछ डोगरा की निगरानी में होता था। सुब्रत राय की निजी सुविधाओं का प्रबंधन भी वही संभालते थे, जिसके चलते उनका कद संगठन में लगातार बढ़ता चला गया।
सहारा मीडिया में टकराव की कहानी:
वी.एस. डोगरा को बड़ा झटका उस समय लगा जब सुब्रत राय ने सहारा मीडिया का प्रमुख उपेंद्र राय को बना दिया। इसके बाद दोनों के बीच मतभेद सामने आने लगे। यह मतभेद धीरे-धीरे शीत युद्ध में बदल गए। एक अवसर पर विदेश यात्रा के दौरान वी.एस. डोगरा को एयरपोर्ट पर रोक लिया गया था, जहां लंबी जांच के बाद उन्हें छोड़ा गया। इसी दौर से दोनों के बीच संबंधों में खटास बढ़ती चली गई।
समझौता और फिर दूरी:
बताया जाता है कि उपेंद्र राय के जेल जाने के बाद दोनों के बीच तनाव कुछ समय के लिए थम गया। इस दौरान वी.एस. डोगरा ने उपेंद्र राय की पत्नी की आर्थिक मदद भी की थी। उपेंद्र राय के जेल से बाहर आने के बाद दोनों के बीच समझौता हुआ और कुछ समय तक संयुक्त रूप से काम भी किया गया। हालांकि, सुब्रत राय के निधन के बाद दोनों के बीच पुरानी खटास समय-समय पर सामने आती रही।
सरकारी गवाह बनने की अटकलें:
अब वी.एस. डोगरा के सहारा इंडिया परिवार के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से इस्तीफा देने के बाद यह माना जा रहा है कि वह ईडी के लिए सरकारी गवाह बन सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह सहारा इंडिया परिवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ईडी और अन्य जांच एजेंसियां डोगरा की कथित हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करेंगी या फिर किसी समझौते की राह निकलेगी।
जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर नजर:
फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में ईडी की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। वी.एस. डोगरा का इस्तीफा और सरकारी गवाह बनने की संभावना इस पूरे मामले को और गंभीर बना रही है।
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