गाजीपुर (Ghazipur) में एक रिटायर कर्मचारी की मौत के बाद बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Shiksha Vibhag) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हुए श्रीराम राम को रिटायरमेंट के महीनों बाद भी उनका फंड नहीं मिल सका, जिससे वह लगातार परेशान चल रहे थे। परिजनों के अनुसार, इसी मानसिक दबाव के बीच उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
फंड न मिलने से बढ़ी परेशानी:
जानकारी के अनुसार, श्रीराम राम 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें उनका देय फंड प्राप्त नहीं हुआ। वह लगातार विभाग के चक्कर लगाते रहे और अपनी समस्या के समाधान के लिए प्रयास करते रहे। शासन की व्यवस्था के अनुसार, रिटायरमेंट से पहले ही सभी कागजात पूर्ण कर फंड का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हो सका।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप:
मृतक के परिजनों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते फंड का भुगतान नहीं हुआ। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसी माध्यम से एक लाख रुपये की मांग की जा रही थी। परिजनों के मुताबिक, श्रीराम राम इस स्थिति से मानसिक रूप से परेशान हो गए थे और इसी कारण वह अवसाद में चले गए, जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई।
लगातार विभाग के चक्कर लगाते रहे:
बताया गया कि श्रीराम राम अपने फंड से संबंधित मामलों को लेकर लगातार विभाग के संपर्क में थे। उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बावजूद उनके प्रकरण का निस्तारण नहीं हो सका। परिजनों का कहना है कि फंड की राशि में भी कमी कर दी गई थी, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई थी।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा:
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है।
विभागीय पक्ष में देरी की वजह:
वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संबंधित कर्मचारी के कागजात लेखा विभाग तक देर से पहुंचे थे, जिसके कारण फंड जारी होने में विलंब हुआ। साथ ही यह भी बताया गया कि कागजात में कुछ कमियां थीं, जिन्हें पूरा करने में समय लगा।
प्रणाली पर उठे सवाल:
इस घटना के बाद सरकारी व्यवस्था और विभागीय प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। जहां एक ओर कर्मचारी पूरी सेवा अवधि तक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, वहीं सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें समय पर उनका हक न मिलना चिंता का विषय बन गया है। यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को भी दर्शाता है।
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रिपोर्ट: प्रदीप शर्मा
ब्यूरो : हसीन अंसारी

