राम मंदिर चढ़ावा चोरी में ट्रस्ट ने FIR कराई:टिन्नू यादव समेत 8 के नाम; महासचिव चंपत राय समेत बड़े चेहरों को बचाया

अयोध्या (Ayodhya) स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Trust) से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले में करीब 18 दिन बाद गुरुवार को आखिरकार प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। दर्ज एफआईआर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) के ड्राइवर समेत कुल 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, इस प्राथमिकी में चंपत राय (Champat Rai), डॉ. अनिल मिश्रा (Dr. Anil Mishra) सहित अन्य बड़े पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। मामले की जांच अब आगे बढ़ रही है और पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है।

SIT की शुरुआती रिपोर्ट पर दर्ज हुई FIR:

ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन (Krishna Mohan) ने विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया है। एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने टिन्नू, लवकुश और अनुकल्प नाम के तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, शेष पांच आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

18 दिन पहले सामने आया था मामला:

चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने 13 जून को जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच पूरी करने के बाद एसआईटी ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी:

सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय (Champat Rai) और डॉ. अनिल मिश्रा (Dr. Anil Mishra) का इस्तीफा लिखवा लिए जाने की चर्चा भी सामने आई है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) के अध्यक्ष आलोक कुमार (Alok Kumar) ने कहा कि एफआईआर दर्ज होना संतोषजनक कदम है, लेकिन जिन लोगों के नाम इसमें शामिल नहीं हैं, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पहले इन नामों के शामिल होने की चर्चा थी:

इससे पहले सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई थी कि विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच रिपोर्ट में चंपत राय (Champat Rai), ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा (Dr. Anil Mishra) और निर्माण प्रभारी गोपाल राव (Gopal Rao) समेत 17 लोगों को आरोपी माना था। ऐसे में इनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन दर्ज प्राथमिकी में इनके नाम शामिल नहीं किए गए।

जांच में मिले अहम तथ्य:

जांच के दौरान विशेष जांच दल (SIT) को दानपात्रों की चाबियां टिन्नू के पास मिलने की बात सामने आई। इसके अलावा एसआईटी ने ऐसे लगभग 150 सेवादारों और कर्मचारियों की पहचान की थी, जिनकी आर्थिक स्थिति 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बदली हुई पाई गई। इन तथ्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई:

एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराएं भी लगाई गई हैं। यह अधिनियम सामान्यतः सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होता है। ऐसे में जांच के दौरान चढ़ावे की राशि की गिनती और उसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India-SBI) में जमा कराने की प्रक्रिया से जुड़े सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई संभव है।

मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष जांच की कही थी बात:

इससे पहले 19 जून को अयोध्या (Ayodhya) में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा था कि विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्ष जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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