भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) विधानसभा चुनाव 2027 से पहले 25 जून को अपनी नई संगठनात्मक टीम की घोषणा कर दी है। महिला आरक्षण बिल के बाद बने राजनीतिक माहौल के बीच पार्टी ने अपनी नई कार्यकारिणी में महिलाओं को प्रमुख स्थान दिया है। नई टीम में महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सहित कुल 13 प्रभावशाली महिला नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पार्टी ने इन नियुक्तियों के जरिए संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ सामाजिक संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया है।
सामाजिक संतुलन पर दिखा विशेष फोकस:
नई संगठनात्मक टीम में शामिल 13 महिला नेताओं के चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा गया है। इनमें 4 सामान्य वर्ग, 6 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और 3 अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाली महिलाएं शामिल हैं। पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए संगठन को और व्यापक बनाने का प्रयास किया है।
प्रियंका रावत को फिर मिली अहम जिम्मेदारी:
प्रियंका रावत (Priyanka Rawat) के माता-पिता मूल रूप से बरेली (Bareilly) के रहने वाले हैं, जबकि उनकी शादी बाराबंकी (Barabanki) के रघुनाथ रावत से हुई है। छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाली प्रियंका वर्ष 2013 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुई थीं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मात्र 28 वर्ष की उम्र में उन्हें बाराबंकी (Barabanki) से प्रत्याशी बनाया गया, जहां उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया को 2.11 लाख मतों के अंतर से हराया।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उनका टिकट काटकर उपेंद्र रावत को उम्मीदवार बनाया गया था। उस समय उनकी भावुक प्रतिक्रिया भी चर्चा में रही थी। स्वतंत्रदेव सिंह की संगठनात्मक टीम में प्रदेश महामंत्री का दायित्व निभाने के बाद अब पंकज चौधरी की नई टीम में उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। संगठन में उनकी सक्रियता और दलित समाज में उनकी पकड़ को महत्वपूर्ण माना जाता है।
संघ की पृष्ठभूमि से संगठन तक पहुंचीं अर्चना:
अर्चना (Archana) का परिवार लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा रहा है। उनके पिता सीपी मिश्रा मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कार्यरत रहे हैं। पारिवारिक वातावरण के कारण अर्चना बचपन से ही राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ गई थीं। उनके पति संजय त्रिपाठी भी संघ से जुड़े हैं और व्यवसाय करते हैं।
अर्चना ने बख्शी का तालाब (Bakshi Ka Talab-BKT) मंडल अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा वाराणसी (Varanasi) में संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। वे उज्ज्वला योजना की संयोजिका, बाराबंकी (Barabanki) की जिला प्रभारी और वर्तमान में उन्नाव (Unnao) जिले की प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं।
पूजा पाल को भाजपा में मिला नया दायित्व:
अति पिछड़े पाल समाज से आने वाली पूजा पाल (Pooja Pal) की राजनीतिक यात्रा उनके पति राजू पाल की हत्या के बाद शुरू हुई। शुरुआती उपचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वर्ष 2007 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर उन्होंने अशरफ को हराकर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। वर्ष 2012 में भी उन्होंने अपनी जीत बरकरार रखी और बाद में समाजवादी पार्टी (SP) में शामिल हो गईं। वर्ष 2022 में उन्होंने कौशांबी (Kaushambi) की चायल सीट से चुनाव जीता।
फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी लाइन से अलग जाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई की सराहना करने के बाद समाजवादी पार्टी (SP) ने उन्हें निष्कासित कर दिया। अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन्हें अपनी नई संगठनात्मक टीम में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है।
डॉक्टरी के साथ संगठन में भी सक्रिय रहीं डॉ. कीर्तिका:
डॉ. कीर्तिका अग्रवाल (Dr. Kirtika Agrawal) प्रयागराज (Prayagraj) की लैप्रोस्कोपिक सर्जन हैं। उनके पति डॉ. नीरज अग्रवाल भी जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन हैं। उनके पिता गिरधर दास लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे, जिसके चलते डॉ. कीर्तिका भी बचपन से संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी रहीं।
सामाजिक कार्यों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। प्रयागराज (Prayagraj) में महाकुंभ और माघ मेले के दौरान उन्होंने नि:शुल्क चिकित्सा शिविर और भंडारे का आयोजन किया। साथ ही गौशाला संचालन और जैविक खेती से भी जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2017 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के प्रयागराज (Prayagraj) रोड शो की मुख्य संयोजक भी वही थीं।
गीता शाक्य को प्रदेश महामंत्री का दायित्व:
ओबीसी समाज से आने वाली गीता शाक्य (Geeta Shakya), जिन्हें गीता उर्फ चंद्रप्रभा शाक्य के नाम से भी जाना जाता है, मूल रूप से हमीरपुर (Hamirpur) से हैं और उनकी शादी औरैया (Auraiya) में हुई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षिका के रूप में की और वर्ष 2005 से 2010 तक प्रधानाध्यापिका रहीं।
वर्ष 2000 में ग्राम प्रधान बनने के साथ उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़कर संगठन में लगातार सक्रिय रहीं। वर्ष 2021 में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और वे राज्यसभा सांसद भी रहीं। अब संगठन में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रजनी पांडेय का छात्र राजनीति से संगठन तक सफर:
प्रदेश मंत्री बनाई गईं रजनी पांडेय (Rajni Pandey) ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से छात्र राजनीति के माध्यम से की थी। उनके पति पत्रकार हैं। पूर्वांचल के देवरिया (Deoria) से आने वाली रजनी पांडेय संगठनात्मक गतिविधियों में लगातार सक्रिय रही हैं।
उन्होंने गुजरात (Gujarat) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के चुनावों में भी पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम किया। संगठन के विभिन्न अभियानों और कार्यक्रमों में समय-समय पर कई जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब उन्हें प्रदेश कार्यसमिति में प्रदेश मंत्री का दायित्व सौंपा गया है।
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