प्रयागराज जिले में इन दिनों एक पागल कुत्ते की दहशत ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग सड़क पर निकलने से पहले एक-दूसरे के साथ घेरा बनाकर चल रहे हैं। बच्चों को अकेले बाहर भेजना बंद कर दिया गया है और अभिभावक खुद अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने को मजबूर हैं। घरों के सामने जहां कभी बच्चों की किलकारियां सुनाई देती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग आशंकित हैं और हर समय किसी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
पिछले दस दिनों के भीतर इस पागल कुत्ते ने 37 से अधिक लोगों को काटकर घायल कर दिया है। हमलों के बाद लोग हाथ और पैर में गहरे जख्म लेकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। कुत्ते को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी फैल रही हैं कि वह कभी किसी गली में दिखा तो कभी किसी दूसरे इलाके में। युवाओं की टोलियों ने कई बार लाठी-डंडों के सहारे कुत्ते को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन हर बार किसी को घायल करने के बाद वह जंगल की ओर भाग जाता है।
पूरा मामला क्या है:
यह पूरा मामला प्रयागराज (Prayagraj) शहर से करीब 45 किलोमीटर दूर शंकरगढ़ (Shankargarh) इलाके का है। शंकरगढ़ के पटहट रोड रेलवे फाटक से लेकर रानीगंज (Raniganj) क्षेत्र तक इस खतरनाक कुत्ते का आतंक फैला हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुत्ता अचानक लोगों पर हमला कर देता है और उन्हें गंभीर रूप से जख्मी कर देता है। हमले के दौरान वह हाथ और पैर का मांस तक नोच लेता है, जिससे घायलों को काफी पीड़ा सहनी पड़ रही है।
कुत्ते के हमले से दहशत:
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कुत्ता बेहद आक्रामक हो चुका है। वह राह चलते लोगों, बच्चों और महिलाओं पर बिना किसी उकसावे के टूट पड़ता है। हमलों में घायल होने वालों में छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। घायलों की उम्र दो साल से लेकर 65 साल तक बताई जा रही है, जिससे साफ है कि कुत्ता किसी एक वर्ग को नहीं बल्कि हर किसी को निशाना बना रहा है। इस कारण इलाके में डर का माहौल है और लोग अपने दैनिक कामकाज तक सीमित कर चुके हैं।
घायलों की लंबी सूची:
इस पागल कुत्ते के हमले में शिव पुजन (21), रवि (12), इंद्रावती (60), यश (5), राधा (20), बकरिदान (26), लक्ष्मी (65), रोशनी (30), आशीष (25), सुशीला (55), सोनाली (11), प्रतीक्षा (10), सुधीर (15), दीप यादव (6), नीलेश (2), राखी केशरवानी (41), राम मिलन (60), धनंजय सिंह (29), संदीप (7), मुस्कान (3), अभिषेक (22), स्लोक (8), दयावती (55), यश (7), निशा (40), शोभित (20), अमित (27), मुन्नी देवी (50), मीरा केशरवानी (45), विनोद (40), राजकुमार (45), साधना (30), मुरलीधर (58), रोहित (25), सुधांशु (26), शिवाना देवी (19) और अमित कुमार (40) शामिल हैं। सभी घायल अलग-अलग गांवों और मोहल्लों से हैं, जिससे कुत्ते के आतंक का दायरा काफी बड़ा माना जा रहा है।
अस्पतालों में इलाज की स्थिति:
कुत्ते के काटने के बाद ज्यादातर घायल लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Center) शंकरगढ़ पहुंच रहे हैं। चिकित्सक डॉ अभिषेक सिंह के अनुसार सभी घायलों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन और प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। कुछ मामलों में जख्म काफी गहरे हैं, इसलिए मरीजों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि एंटी-रेबीज इंजेक्शन की सीमित उपलब्धता के कारण कुछ घायलों को जिला अस्पताल (District Hospital) रेफर किया जा सकता है।
लोगों का आरोप और प्रशासन की भूमिका:
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर पहले भी प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि यदि पहले ही नियंत्रण किया गया होता, तो इतने बड़े स्तर पर लोग घायल होने से बच सकते थे। फिलहाल हालात यह हैं कि लोग बच्चों को स्कूल भेजने और रोजमर्रा के कामों के लिए घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं।
प्रशासन की अपील:
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी पागल कुत्ते की मौजूदगी दिखाई दे या हमला हो, तो तुरंत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग (Health Department) को सूचना दें। इससे समय रहते कुत्ते को पकड़कर स्थिति पर काबू पाया जा सके। साथ ही लोगों को सलाह दी गई है कि वे समूह में बाहर निकलें, बच्चों को अकेला न छोड़ें और किसी भी संदिग्ध जानवर से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
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