Video: गाजीपुर पहुंचे संत पंकज जी महाराज, श्रद्धालुओं को दिया ये संदेश!

रिपोर्टर: हसीन अंसारी

गाजीपुर जनपद में जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा (Mathura) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत पंकज जी महाराज ने प्राथमिक विद्यालय सकरा में आयोजित सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं को जीवन सुधार का संदेश दिया। अपने काफिले के पड़ाव के समय हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। सत्संग में उन्होंने शराब और मांसाहार के त्याग, सेवा, सत्संग और नाम की कमाई को मानव जीवन का मूल आधार बताया।

कार्यक्रम के दौरान संत पंकज जी महाराज ने श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह मानव जीवन चौरासी लाख योनियों के बाद प्राप्त हुआ है और इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। सत्संग के माध्यम से उन्होंने लोगों को आत्मिक उन्नति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

संत सत्गुरु की खोज पर जोर:
अपने प्रवचन में संत पंकज जी महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति भवसागर से पार होना चाहता है, उसे प्रभु की प्राप्ति कराने वाले संत सत्गुरु की खोज करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सत्गुरु के मार्गदर्शन के बिना जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ पाना कठिन है। सत्संग, सेवा और नाम स्मरण के जरिए ही आत्मा को शांति और दिशा मिलती है।

उन्होंने कहा कि केवल बाहरी आडंबर से मुक्ति संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए अंदर से परिवर्तन आवश्यक है। संत सत्गुरु की शरण में जाकर ही मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है और सही मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।

सेवा, सत्संग और नाम की कमाई का महत्व:
संत पंकज जी महाराज ने कहा कि सेवा, सत्संग और नाम की कमाई ही सच्ची पूंजी है। यह ऐसी पूंजी है, जो न इस लोक में नष्ट होती है और न ही परलोक में। उन्होंने बताया कि सांसारिक धन सीमित होता है, लेकिन नाम की कमाई आत्मा के साथ जाती है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में सत्संग को स्थान दें और सेवा भाव को अपनाएं। इससे समाज में आपसी भाईचारा बढ़ेगा और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

सुरत शब्द योग की साधना का वर्णन:
प्रवचन के दौरान संत पंकज जी महाराज ने सुरत शब्द योग, जिसे नाम योग भी कहा जाता है, की साधना की विधि विस्तार से समझाई। उन्होंने कहा कि इस साधना के माध्यम से आत्मा शरीर से बाहर निकलकर आसमानों का सफर करती है। इससे साधक त्रिकालदर्शी बनता है और उसे आत्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है।

उन्होंने बताया कि सुरत शब्द योग के अभ्यास से जीवात्मा जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त हो सकती है। यह साधना व्यक्ति को भीतर से जागरूक बनाती है और उसे अपने वास्तविक स्वरूप का बोध कराती है।

मानव जीवन को बताया अनमोल अवसर:
संत पंकज जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन चौरासी लाख योनियों से निकलने का एकमात्र अवसर है। इस जीवन में ही आत्मिक साधना करके मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इस अवसर को पहचानकर साधना करता है, वही अपने जीवन को सफल बनाता है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे भोग-विलास और गलत आदतों में समय न गंवाएं, बल्कि आत्मिक उन्नति के मार्ग को अपनाएं।

मांसाहार और शराब पर कड़ा संदेश:
संत पंकज जी महाराज ने अपने संबोधन में मांसाहार और शराब सेवन को लेकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य मूल रूप से शाकाहारी प्राणी है, लेकिन अपनी बुद्धि और बल के कारण जीवों की हिंसा करता है और उनके मांस का भक्षण करता है। साथ ही शराब का सेवन कर अपने शरीर और समाज को नुकसान पहुंचाता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि इन कृत्यों की सख्त सजा मिलती है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ती हिंसा, अपराध और सामाजिक अव्यवस्था को मांसाहार और शराब सेवन का परिणाम बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से इन बुराइयों को छोड़ने का संकल्प लेने की अपील की।

समाज सुधार की दिशा में संदेश:
सत्संग के दौरान संत पंकज जी महाराज ने कहा कि यदि समाज को शांति और सद्भाव की ओर ले जाना है, तो प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में संयम और अनुशासन अपनाना होगा। शराब और मांसाहार के त्याग से न केवल व्यक्ति का स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक वातावरण बनता है।

उन्होंने कहा कि सत्संग के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर झांक सकता है और गलतियों को सुधारने का साहस जुटा सकता है। यही सत्संग का वास्तविक उद्देश्य है।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह:
प्राथमिक विद्यालय सकरा में आयोजित इस सत्संग में श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने संत पंकज जी महाराज के संदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और शांत वातावरण बना रहा।

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