प्रयागराज: मंदिर संपत्ति को लेकर कब्जे का आरोप, हजारों करोड़ की संपत्ति दांव पर लगी

रिपोर्टर: अनुज कुमार

प्रयागराज (Prayagraj) में सनातन परंपरा से जुड़े एक प्रमुख धार्मिक संस्थान को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। उत्तराधिकारी चयन को लेकर उठे इस विवाद में करोड़ों की मंदिर और आश्रम संपत्ति पर कब्जे के प्रयास के आरोप लगाए जा रहे हैं। मामला दारागंज (Daraganj) क्षेत्र में स्थित वेंकटेश मंदिर, श्री राम देशिक संस्कृत महाविद्यालय और श्री वैष्णव आश्रम से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। आरोप है कि नियम और परंपरा के विरुद्ध उत्तराधिकारी घोषित कर मंदिर न्यास की संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।

उत्तराधिकारी विवाद से गहराया संकट:
मामले की जड़ आश्रम के महंत ब्रह्मलीन पुरूषोतमाचार्य के देहावसान के बाद उत्तराधिकारी चयन को लेकर बताई जा रही है। आरोप है कि करोड़ों, बल्कि हजारों करोड़ की संपत्ति से जुड़े इस धार्मिक संस्थान में परंपरागत प्रक्रिया का पालन किए बिना उत्तराधिकारी बनाने का प्रयास किया गया। इसे सनातन परंपरा के विरुद्ध बताया जा रहा है।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल:
इस पूरे प्रकरण में प्रयागराज पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि मौके पर पीएसी लगाकर एक कार्यक्रम को संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है, जबकि स्वामी अनंताचार्य की बात नहीं सुनी जा रही। इसे लेकर संत समाज और आश्रम से जुड़े लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

कल्प राज सिंह पर लगे आरोप:
विवाद में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (Uttar Pradesh Public Service Commission) के मनोनीत सदस्य कल्प राज सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि ट्रस्टी डीड और गुरु के देहावसान के बाद तय नियमों के विपरीत जाकर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रविवार को पुलिस की मदद से राजेंद्र को उत्तराधिकारी बनाने का प्रयास किया गया, जबकि आश्रम के महंत ब्रह्मलीन पुरूषोतमाचार्य का उत्तराधिकारी पहले ही गरुड़ध्वजाचार्य को बनाया जा चुका है।

सनातन परंपरा की लड़ाई तेज:
इस मामले में अवभिनुक्तेश्वर नन्द की भूमिका भी चर्चा में है और सनातन परंपरा की इस लड़ाई ने जोर पकड़ लिया है। संत समाज के बीच यह मुद्दा लगातार उठ रहा है कि नियम, परंपरा और संस्थापक की इच्छा के विरुद्ध किसी भी तरह का निर्णय स्वीकार्य नहीं है।

वेंकटेश मंदिर से जुड़ा विवाद:
दारागंज (Daraganj) स्थित वेंकटेश मंदिर और उससे जुड़े संस्कृत महाविद्यालय पर भी इसी तरह के कब्जे के प्रयास का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर पुलिस प्रशासन कथित रूप से कब्जा करने वालों का साथ दे रहा है। इससे मंदिर और आश्रम की संपत्ति पर खतरा बढ़ने की बात कही जा रही है।

प्रशासन से नहीं मिली सहायता:
स्वामी अनंताचार्य और उनके मंडल द्वारा इस विषय को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के समक्ष प्रयास किए जाने की बात कही गई है, लेकिन आरोप है कि कहीं से भी सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इससे विवाद और अधिक गहराता जा रहा है।

शिकायत पत्र में क्या कहा गया:
इस पूरे मामले को लेकर एक विस्तृत शिकायत पत्र भी सामने आया है, जिसमें बताया गया है कि प्रयाग न्यास परिषद से जुड़ी संपत्ति को अनाधिकृत रूप से हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत में उल्लेख है कि संस्था के संस्थापक की इच्छा और बायलॉज के अनुसार महंत के देहावसान के बाद उप-महंतों की सहमति से बैकुण्ठोत्सव के अवसर पर उत्तराधिकारी चयन की परंपरा है।

पट्टाभिषेक के बाद नया विवाद:
शिकायत के अनुसार, 24 जनवरी 2026 को परंपरागत विधि से गरुड़ध्वजाचार्य ब्रह्मचारी का पट्टाभिषेक किया गया और उन्हें महंत पद पर आसीन किया गया। इसके बाद अचानक एक अन्य व्यक्ति को महंत और उत्तराधिकारी घोषित करने का आमंत्रण पत्र सामने आया, जिसे अवैध और गैर-परंपरागत बताया गया है।

संपत्ति पर कब्जे का आरोप:
आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया के पीछे मंदिर और न्यास परिषद की संपत्ति पर अनाधिकृत कब्जे का षड्यंत्र है। कहा गया है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो न केवल प्रयागराज बल्कि मध्य भारत के सैकड़ों मंदिरों की संपत्ति पर भी ऐसा ही खतरा उत्पन्न हो सकता है।

मामले की गंभीरता:
यह पूरा मामला धार्मिक आस्था, परंपरा और संपत्ति से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। संत समाज की ओर से मांग की जा रही है कि नियमों और परंपरा के अनुसार ही निर्णय लिया जाए और किसी भी प्रकार का अवैध हस्तक्षेप रोका जाए।

Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com


#Prayagraj #TempleDispute #Sanatan #MathProperty #UttarPradesh

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading