समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से निष्कासित विधायक पूजा पाल (Pooja Pal) को भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया। पूजा पाल का राजनीतिक सफर संघर्ष, व्यक्तिगत त्रासदी और लगातार बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है। शादी के महज नौ दिन बाद पति की हत्या के बाद उन्हें परिस्थितियों के चलते राजनीति में उतरना पड़ा। शुरुआती चुनावी हार के बावजूद उन्होंने संघर्ष जारी रखा और बाद में चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पहचान स्थापित की। समय के साथ उनके राजनीतिक जीवन में कई बदलाव आए और अंततः अब उन्हें भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।
राजनीति में आने की कहानी:
पूजा पाल (Pooja Pal) का जन्म 25 जुलाई 1979 को प्रयागराज (Prayagraj) के कटघर क्षेत्र में हुआ। उनके पिता अमृतलाल पाल साइकिल मरम्मत का कार्य करते थे। वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में उनकी मुलाकात राजू पाल (Raju Pal) से हुई, जो सक्रिय राजनीति में थे। वर्ष 2004 के इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) के उम्मीदवार के रूप में राजू पाल ने चुनाव जीतकर राजनीतिक पहचान बनाई। इसी दौरान दोनों ने 15 जनवरी 2005 को विवाह किया, लेकिन शादी के नौ दिन बाद ही राजू पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूजा पाल का जीवन पूरी तरह बदल दिया।
पहली हार के बाद नहीं छोड़ा संघर्ष:
राजू पाल की हत्या के बाद इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) ने पूजा पाल को उम्मीदवार बनाया, जबकि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने अशरफ (Ashraf) को मैदान में उतारा। इस चुनाव में पूजा पाल को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी उन्होंने राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी रखी। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अशरफ को हराकर जीत दर्ज की। वर्ष 2012 में उन्होंने अतीक अहमद (Atiq Ahmed) के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की और लगातार दूसरी बार विधायक बनीं।
राजनीतिक सफर में आए कई बदलाव:
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पूजा पाल को हार मिली। इसके बाद वर्ष 2018 में उन्हें बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) से बाहर कर दिया गया। वर्ष 2019 में उन्होंने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने उस समय कहा था कि मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के दौर में वह पार्टी में नहीं गई थीं, लेकिन अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के नेतृत्व में उन्हें लगा कि पार्टी की सोच अलग है, इसलिए उन्होंने सपा का साथ चुना।
चायल से विधायक बनने के बाद बदले राजनीतिक समीकरण:
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने पूजा पाल को कौशांबी (Kaushambi) की चायल विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने चुनाव जीतकर तीसरी बार विधायक बनने में सफलता हासिल की। इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आया। 15 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद (Atiq Ahmed) और अशरफ (Ashraf) की हत्या के बाद पूजा पाल का राजनीतिक रुख बदलता दिखाई दिया। उन्होंने धीरे-धीरे समाजवादी पार्टी से दूरी बना ली और विभिन्न अवसरों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की जीरो टॉलरेंस नीति की सार्वजनिक रूप से सराहना की।
सपा से निष्कासन के बाद भाजपा में नई जिम्मेदारी:
14 अगस्त 2025 को समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद उनके भाजपा के साथ खड़े होने की चर्चा लगातार होती रही, हालांकि उन्होंने भाजपा कब औपचारिक रूप से जॉइन की, इसकी सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई। मई 2026 में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उनके नाम की चर्चा भी हुई, लेकिन उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। अब भाजपा (Bharatiya Janata Party) ने उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर संगठन में अहम स्थान दिया है।
राजनीतिक सफर का नया अध्याय:
व्यक्तिगत त्रासदी से शुरू हुआ पूजा पाल का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से गुजरते हुए अब भाजपा संगठन में नई जिम्मेदारी तक पहुंच गया है। शुरुआती हार, लगातार संघर्ष, चुनावी जीत, दल परिवर्तन और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच उनका राजनीतिक जीवन उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है।
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