लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कौशल विकास, उद्योगों की जरूरतों और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को एक-दूसरे से जोड़ने के उद्देश्य से लखनऊ के ताज पैलेस, विभूति खंड, गोमती नगर में पीएम-सेतु उद्योग सम्मेलन-उत्तर प्रदेश सहभागिता का आयोजन किया गया। सम्मेलन में कौशल प्रशिक्षण को औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप बनाने, प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक स्वरूप देने और युवाओं के लिए रोजगार के स्पष्ट अवसर तैयार करने पर जोर दिया गया।

उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय पर जोर:
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से इस सम्मेलन का आयोजन किया। इसका मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक शिक्षा में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को विश्वस्तरीय उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करने को लेकर विचार-विमर्श करना रहा।
कार्यक्रम में रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह (Rajnath Singh), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary), उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) और व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल (Kapil Dev Agarwal) मौजूद रहे।
इसके अलावा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) के महानिदेशक दिलीप कुमार (Dilip Kumar), संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर (Mansi Sahay Thakur), उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम (Dr. Hari Om) और इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय किरण आनंद (Vijay Kiran Anand) सहित उद्योग, प्रशिक्षण संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और शासन-प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए।
रक्षा और विनिर्माण क्षेत्र के प्रतिनिधि हुए शामिल:
सम्मेलन में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल), ब्रह्मोस एयरोस्पेस, ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (टीसीएल), एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एडब्ल्यूईआईएल), ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआईएल), अशोक लेलैंड, एनएसडीसी, टीसीआईएल और पीटीसी सहित प्रमुख रक्षा एवं विनिर्माण संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विश्व बैंक, उद्योग संघों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

राजनाथ सिंह बोले- कुशल मानव संसाधन जरूरी:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी देश के विकास में मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। भारत को वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद उनका पूरा लाभ तभी लिया जा सकता है, जब उन्हें संचालित करने के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन मौजूद हो।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनसांख्यिकीय शक्ति को जनसांख्यिकीय लाभांश और उत्पादक लाभांश में बदलने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। रक्षा विनिर्माण, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन, रोबोटिक्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और स्वचालन जैसे क्षेत्रों में तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं। ऐसे में भविष्य की जरूरतों के अनुसार कुशल कार्यबल तैयार करना आवश्यक है।
राजनाथ सिंह ने बताया कि पीएम-सेतु के माध्यम से सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था और नए पाठ्यक्रमों से युक्त किया जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विनिर्माण एवं रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में उभरने और रक्षा औद्योगिक गलियारे की भी चर्चा की।
उन्होंने उद्योग जगत से पीएम-सेतु को केवल सरकारी योजना के रूप में न देखने, बल्कि इसे साझा राष्ट्रीय मिशन के तौर पर आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों से भी इसमें सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा जताई। उनके अनुसार पीएम-सेतु की सफलता का आकलन केवल स्थापित मशीनों से नहीं, बल्कि इससे पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों से किया जाना चाहिए।
जयंत चौधरी ने प्रशिक्षण और रोजगार की दूरी घटाने पर दिया जोर:
जयंत चौधरी ने कहा कि पीएम-सेतु सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी का नया मॉडल प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण और रोजगार के बीच मौजूद दूरी को कम करना है।
उन्होंने उद्योगों से केवल सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी पहलों तक सीमित न रहने की अपील की। उन्होंने आईटीआई समूहों के विकास, संचालन और व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया।
उत्तर प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर सरकार प्रतिबद्ध:
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, बड़ा बाजार, विशाल युवा आबादी और तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन मौजूद है। उन्होंने सम्मेलन में शामिल उद्योगों को राज्य सरकार की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया।
कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में पीएम-सेतु के तहत 8 समूहों में 32 आईटीआई चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 7 समूह फिलहाल उद्योग सहयोग के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकार पूरी कोशिश करेगी।
तकनीकी क्षेत्रों में कुशल तकनीशियनों की मांग:
सम्मेलन में रक्षा और रणनीतिक उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में कुशल तकनीशियनों की बढ़ती जरूरत को रेखांकित किया। इनमें एयरोस्पेस प्रणाली, जहाज निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन, उन्नत वेल्डिंग, मेकाट्रॉनिक्स और ड्रोन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र शामिल रहे।
पीएम-सेतु के तहत एक हब आईटीआई और चार स्पोक आईटीआई वाले समूह में 241 करोड़ रुपये तक के निवेश का प्रावधान बताया गया। इसमें केंद्र सरकार का 50 प्रतिशत, राज्य सरकार का 33 प्रतिशत और उद्योग साझेदारों का 17 प्रतिशत योगदान होगा।
समूह संचालन के लिए प्रस्तावित एसपीवी व्यवस्था में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स को 51 प्रतिशत स्वामित्व, जबकि केंद्र और राज्य सरकार को 24.5-24.5 प्रतिशत स्वामित्व देने की व्यवस्था बताई गई। वर्तमान में 5 राज्यों के 7 समूहों में स्वीकृत उद्योग साझेदारी प्रस्ताव 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
‘शौर्य अकादमी’ के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर:
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को सशस्त्र बलों, पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में करियर के लिए तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) और लखनऊ छावनी बोर्ड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत ‘शौर्य अकादमी’ की स्थापना की जाएगी।
कार्यक्रम के समापन पर प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरिओम ने भारत सरकार के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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