उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आजमगढ़ (Azamgarh) में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान सुभासपा (SBSP) प्रमुख और पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर (OP Rajbhar) ने समाजवादी पार्टी (SP) और उसके नेतृत्व पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। शहर के सर्किट हाउस (Circuit House) में पत्रकारों और आम लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपराध, जातीय राजनीति, कानून-व्यवस्था और विपक्ष की भूमिका को लेकर कई बयान दिए। उनके वक्तव्य के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
अपराध और जातीय राजनीति पर साधा निशाना:
ओपी राजभर (OP Rajbhar) ने आरोप लगाया कि अपराधियों को संरक्षण देना और जाति के आधार पर राजनीति करना समाजवादी पार्टी (SP) की पुरानी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछड़े और दलित समाज के लोगों के साथ होने वाली हत्या और उत्पीड़न की घटनाओं पर विपक्ष अक्सर चुप्पी साध लेता है। वहीं, जब किसी मामले में आरोपी किसी विशेष जाति से जुड़ा होता है तो उसके बचाव में पूरी ताकत झोंक दी जाती है।
उन्होंने अपने बयान में कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न मामलों में आरोपियों के जातीय संबंधों को लेकर राजनीति की जाती है, जो समाज के लिए उचित नहीं है। हालांकि, इन दावों को उन्होंने अपने राजनीतिक दृष्टिकोण के आधार पर रखा।
जौनपुर मुठभेड़ पर विपक्ष को घेरा:
जौनपुर (Jaunpur) में हुई मुठभेड़ को लेकर समाजवादी पार्टी (SP) अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ओपी राजभर (OP Rajbhar) ने कहा कि जिस आरोपी रवि यादव (Ravi Yadav) के पक्ष में विपक्ष बयान दे रहा है, उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके आपराधिक रिकॉर्ड को भी देखा जाना चाहिए।
सड़क पर नमाज को लेकर कही यह बात:
ओपी राजभर (OP Rajbhar) ने सार्वजनिक मार्गों पर नमाज अदा किए जाने को लेकर जारी सरकारी निर्देशों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों की व्यवस्था के अनुसार सार्वजनिक मार्गों पर यातायात बाधित नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक गतिविधियां निर्धारित स्थानों पर ही संपन्न होनी चाहिए ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पिछड़े और दलित समाज के मुद्दों का उठाया जिक्र:
जनसुनवाई के दौरान मंत्री ने कहा कि पिछड़े और दलित समाज से जुड़े मामलों पर विपक्ष का रवैया एक जैसा नहीं रहता। उन्होंने आरोप लगाया कि कई घटनाओं में पीड़ित पक्ष के समर्थन में अपेक्षित आवाज नहीं उठाई जाती। उन्होंने एक जनप्रतिनिधि की हत्या के मामले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आरोपियों को बचाने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप तक किया गया था।
सपा की होर्डिंग को लेकर भी प्रतिक्रिया:
हाल ही में लखनऊ (Lucknow) स्थित समाजवादी पार्टी (SP) मुख्यालय के बाहर लगाए गए एक होर्डिंग का भी उन्होंने जिक्र किया। यह होर्डिंग युवजन सभा (Yuvjan Sabha) के उपाध्यक्ष पंकज राजभर (Pankaj Rajbhar) की ओर से लगाई गई थी। इसमें वर्ष 2024 से 2026 के बीच राजभर समाज से जुड़े लोगों पर अत्याचार और हत्या की घटनाओं का उल्लेख किया गया था। इस राजनीतिक संदेश को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज रही।
अखिलेश यादव पर पहले भी कर चुके हैं टिप्पणी:
ओपी राजभर (OP Rajbhar) और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के बीच बयानबाजी नई नहीं है। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। राजभर ने पूर्व में सामाजिक, राजनीतिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर भी समाजवादी पार्टी (SP) के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।
पूर्वांचल में अहम माना जाता है राजभर वोट बैंक:
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में राजभर समाज का प्रभाव विशेष रूप से पूर्वांचल (Purvanchal) क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध राजनीतिक आंकड़ों के अनुसार, कई लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में इस समुदाय की निर्णायक भूमिका मानी जाती है। यही वजह है कि विभिन्न राजनीतिक दल इस वर्ग के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं।
ओपी राजभर (OP Rajbhar) ने भी अपने राजनीतिक सफर में राजभर समाज के समर्थन के आधार पर सुभासपा (SBSP) को मजबूत किया है। ऐसे में पूर्वांचल की राजनीति में उनका प्रभाव और बयान दोनों राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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