ऑनलाइन गेमिंग का बच्चों और किशोरों पर बढ़ता प्रभाव अब न्यायिक स्तर पर भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। इसी क्रम में Allahabad High Court (इलाहाबाद हाईकोर्ट) की Lucknow Bench (लखनऊ पीठ) ने नाबालिगों पर ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते असर को गंभीरता से लेते हुए Roblox (रोब्लॉक्स) सहित अन्य ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने मामले में Central Government (केंद्र सरकार), State Government (राज्य सरकार) और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब करते हुए सभी विपक्षी पक्षकारों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिका पर अदालत की प्रारंभिक कार्रवाई:
यह जनहित याचिका एक स्थानीय अधिवक्ता की ओर से दायर की गई है। मामले की सुनवाई Justice Rajan Roy (न्यायमूर्ति राजन रॉय) और Justice Manjiv Shukla (न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला) की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में सभी संबंधित संस्थाओं का पक्ष सामने आने के बाद आगे की सुनवाई की जाएगी।
याचिका में क्या उठाए गए हैं मुद्दे:
याचिका में कहा गया है कि Roblox (रोब्लॉक्स) जैसे ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहार और साइबर सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि नाबालिगों की ऐसे प्लेटफॉर्म तक आसान पहुंच कई प्रकार की चुनौतियां पैदा कर सकती है। इसी आधार पर अदालत से अनुरोध किया गया है कि Central Government (केंद्र सरकार) और संबंधित एजेंसियों को ऐसे प्लेटफॉर्म तक नाबालिगों की पहुंच नियंत्रित करने के लिए प्रभावी और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं।
कई संस्थाओं को जारी किया गया नोटिस:
सुनवाई के दौरान अदालत ने National Commission for Protection of Child Rights (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग), Uttar Pradesh State Commission for Protection of Child Rights (उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग), India Online Gaming Authority (भारत ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी तथा Roblox India Services Private Limited (रोब्लॉक्स इंडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने इन सभी पक्षों से मामले पर अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग:
जनहित याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि बाल मनोवैज्ञानिकों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। याचिका के अनुसार यह समिति ऑनलाइन गेमिंग के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी प्रभावों का व्यापक अध्ययन करेगी तथा सरकार को आवश्यक सुरक्षा उपायों और नीतिगत सुझावों की सिफारिश करेगी।
जागरूकता अभियान चलाने की भी मांग:
याचिका में केवल नियामक कदमों की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान, कार्यशालाओं और सेमिनारों के आयोजन की मांग की गई है, ताकि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े संभावित खतरों और साइबर सुरक्षा के प्रति सभी संबंधित पक्षों को जागरूक किया जा सके।
मामले पर आगे होगी सुनवाई:
फिलहाल अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में प्राप्त जवाबों और पक्षकारों के तर्कों पर विचार करने के बाद Allahabad High Court (इलाहाबाद हाईकोर्ट) की Lucknow Bench (लखनऊ पीठ) आगे की सुनवाई में आवश्यक आदेश पारित करेगी।
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com
#Tags: #OnlineGaming #Roblox #AllahabadHighCourt #LucknowBench #ChildSafety #CyberSecurity #PIL #UttarPradesh #Gaming