मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच में Enforcement Directorate (प्रवर्तन निदेशालय) ने कथित अवैध धन को वैध दिखाने के लिए बनाए गए कारोबारी नेटवर्क की पड़ताल तेज कर दी है। जांच के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज मिलने के बाद एजेंसी अब शेल कंपनियों, बेनामी निवेश और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस मामले में Jhansi (झांसी) की Garautha (गरौठा) विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक Deep Narayan Singh Yadav (दीप नारायण सिंह यादव) से जुड़े कारोबारी नेटवर्क की भी गहन जांच की जा रही है।
कारोबारी नेटवर्क तक पहुंची जांच:
जांच के दौरान Enforcement Directorate (प्रवर्तन निदेशालय) को ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनके आधार पर एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित अवैध कमाई को वैध रूप देने के लिए किन-किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। जांच में सामने आया है कि पूर्व विधायक से जुड़ी कई कंपनियों में उनके तीन करीबी साझेदार निदेशक के रूप में जुड़े थे। एजेंसी अब इन तीनों की भूमिका और उनके माध्यम से हुए वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।
शेल कंपनियों के इस्तेमाल की आशंका:
जांच एजेंसी के अनुसार, दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान कई कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन, तीसरे पक्ष के साथ किए गए समझौते तथा संदिग्ध ट्रांजेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं। जांच में कुछ ऐसी कंपनियों की जानकारी भी सामने आई है, जिनके बारे में आशंका जताई जा रही है कि वे केवल कागजी रूप से संचालित हो रही थीं।
एजेंसी को संदेह है कि इन कंपनियों के माध्यम से कथित अपराध से अर्जित धन को वैध कारोबारी गतिविधियों का स्वरूप देकर विभिन्न स्थानों पर निवेश किया गया। फिलहाल इन सभी पहलुओं की जांच जारी है।
करीबी सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल:
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित अवैध कमाई को अपने, परिजनों और करीबी सहयोगियों के नियंत्रण वाली कंपनियों में निवेश किए जाने की आशंका है। इसके अलावा दूर के रिश्तेदारों के नाम पर भी चल और अचल संपत्तियां खरीदे जाने से संबंधित दस्तावेज एजेंसी के हाथ लगे हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर Enforcement Directorate (प्रवर्तन निदेशालय) अब निवेश की पूरी श्रृंखला का मिलान कर रही है, ताकि धन के स्रोत और उसके अंतिम उपयोग की जानकारी प्राप्त की जा सके।
पूछताछ के लिए बुलाए जा सकते हैं निदेशक:
सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद एजेंसी संबंधित तीनों निदेशकों को पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। जांच के दौरान प्राप्त साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर उनकी भूमिका का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में उनकी भूमिका की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
संपत्तियों की जब्ती की भी संभावना:
जांच एजेंसी संदिग्ध बेनामी संपत्तियों और कथित अपराध से अर्जित धन को छिपाने से जुड़े दस्तावेज पहले ही अपने कब्जे में ले चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यदि जांच में आवश्यक आधार स्थापित होते हैं, तो संबंधित संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल एजेंसी दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का परीक्षण कर रही है।
रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की जांच:
जांच में यह भी सामने आया है कि Deep Narayan Singh Yadav (दीप नारायण सिंह यादव) से जुड़े मामले में दूर के रिश्तेदारों के नाम पर भी कई चल और अचल संपत्तियां खरीदे जाने के दस्तावेज मिले हैं। एजेंसी अब इन संपत्तियों की वास्तविक फंडिंग, स्वामित्व और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन संपत्तियों के लिए उपयोग किए गए धन का वास्तविक स्रोत क्या था।
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