बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) की प्रमुख मायावती (Mayawati) ने एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला सशक्तिकरण और आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण पर बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका प्रभाव सीमित दिखाई देता है। उन्होंने इस दिशा में ठोस नीयत और मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया।
महिला सशक्तिकरण पर उठाए सवाल:
मायावती (Mayawati) ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल घोषणाएं करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रभावी नीतियों और उनके सही क्रियान्वयन की जरूरत है। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा प्रयासों में इच्छाशक्ति की कमी नजर आती है, जिससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।
SC-ST और OBC के हितों की अनदेखी का आरोप:
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के हितों की अनदेखी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि इन वर्गों की महिलाओं को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
अलग कोटे की मांग दोहराई:
मायावती (Mayawati) ने स्पष्ट रूप से कहा कि महिला आरक्षण में SC, ST और OBC वर्ग की महिलाओं के लिए अलग कोटा होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना अलग आरक्षण के इन वर्गों की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा। उन्होंने मंडल आयोग (Mandal Commission) जैसी व्यवस्था की जरूरत पर भी जोर दिया और OBC के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण जैसी पहल को महत्वपूर्ण बताया।
सवर्ण महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की मांग:
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने सवर्ण महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के कारण इस मांग पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे व्यापक सामाजिक संतुलन नहीं बन पा रहा है।
33% आरक्षण पर प्रतिक्रिया:
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर उन्होंने कहा कि यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इसका लाभ समाज के सभी वर्गों की महिलाओं तक समान रूप से पहुंचे।
महिला सुरक्षा और सम्मान पर जोर:
मायावती (Mayawati) ने महिला आरक्षण को महिला सुरक्षा और सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि सही नीति और निष्पक्ष क्रियान्वयन के बिना महिलाओं को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे स्वार्थ से ऊपर उठकर महिलाओं के हित में निर्णय लें।
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