Lucknow। उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर विवादों में है। आरोप है कि NRHM घोटाले के आरोपी मुकेश श्रीवास्तव और अंकित चौधरी बीते दो दशकों से विभाग की नीतियों और कार्यप्रणाली पर दबदबा बनाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, ये दोनों स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के आदेशों को दरकिनार कर विभागीय कामकाज अपने हिसाब से करवा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, मुकेश श्रीवास्तव और अंकित चौधरी कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में सीएमओ (मुख्य चिकित्साधिकारी) की ट्रांसफर-पोस्टिंग को उद्योग बना चुके हैं। आरोप है कि दागी डॉक्टरों को सीएमओ पद पर नियुक्त कर उनसे मनमाफिक काम करवाया जाता है, जिससे बड़े पैमाने पर लूट-खसोट हो रही है। सूत्रों के अनुसार, डॉ. सुकेश गुप्ता, डॉ. रंजना गौतम, डॉ. दिलीप सिंह, डॉ. राधा वल्भ और डॉ. नन्कू राम वर्मा समेत कई डॉक्टरों को बिना स्वास्थ्य मंत्री की अनुमति के सीएमओ बनाने की तैयारी है।
दवाओं की सप्लाई तक पर कब्जा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुकेश श्रीवास्तव की कई फर्में हैं, जो परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं। इनमें से कई फर्मों को पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद वे स्वास्थ्य विभाग में सक्रिय हैं। दवाओं की सप्लाई से लेकर विभागीय ठेकों तक, लगभग हर बड़े काम में इनकी सीधी भागीदारी बताई जा रही है।
मंत्री और प्रमुख सचिव को दिखाते हैं ठेंगा
सूत्रों का कहना है कि मुकेश और अंकित विभागीय आदेशों को ठेंगा दिखाते हैं। यहां तक कि वे स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव को बदलवाने की धमकी तक दे चुके हैं। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के समर्थन के चलते यह नेटवर्क आज भी मजबूत बना हुआ है।
इस खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है।
स्वास्थ्य विभाग में दो दशक से हावी NRHM घोटाले के आरोपी, सीएमओ की ट्रांसफर-पोस्टिंग बना उद्योग