सैदपुर के नईकोट गांव (Naikot Village, Saidpur) का रहने वाला मोहम्मद इकबाल (Mohammad Iqbal) 22 साल बाद बांग्लादेश में मिला है। बताया जा रहा है कि मानसिक अस्थिरता के कारण वह वर्षों पहले घर से भटक गया था और वहीं फंस गया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते वे उसे वापस लाने में असमर्थ हैं। पुलिस के लगातार प्रयासों और तकनीकी माध्यमों से उसकी खोज संभव हो पाई है।
2003 में हुआ था लापता:
जानकारी के अनुसार, इकबाल वर्ष 2003 के आसपास घर से लापता हो गया था। परिजनों — माता नजमा बेगम (Najma Begum), पिता कमालुद्दीन (Kamaluddin) और बहन शबनम (Shabnam) — ने स्थानीय थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी, लेकिन वर्षों तक उसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। समय बीतने के साथ माता-पिता बूढ़े और बीमार हो गए, जबकि बहन शबनम अपने मायके में रहकर उनकी देखभाल कर रही हैं।
पुलिस की खोज से मिली सफलता:
गुमशुदगी के मामलों की जांच के तहत खानपुर थाने (Khanpur Police Station) के एसओ राजीव पांडेय (Rajeev Pandey) के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सोशल मीडिया पर मिले कुछ सुरागों ने इस केस को नया मोड़ दिया। पुलिस टीम पहले केरल (Kerala) पहुंची, जहां एक एनजीओ ने बताया कि इकबाल कुछ समय तक सेवादार के रूप में पश्चिम बंगाल में रह चुका है।
HAM रेडियो क्लब ने जोड़ा बांग्लादेश से संपर्क:
पुलिस ने इसके बाद HAM रेडियो क्लब (HAM Radio Club) की मदद ली। इस तकनीकी सहयोग से बांग्लादेश में संपर्क स्थापित किया गया। वहां के पुलिस अधिकारियों ने एक व्यक्ति की तस्वीर पहचानकर पुष्टि की कि वह इकबाल ही है। इसके बाद रविवार को पुलिस ने परिजनों की वीडियो कॉल के माध्यम से इकबाल से बात कराई।
वीडियो कॉल पर भावुक हुए परिजन:
22 साल बाद इकबाल को स्क्रीन पर देखकर परिवार के सदस्यों की आंखें नम हो गईं। बहन शबनम ने बताया कि उन्होंने भाई को जीवित देखकर राहत की सांस ली, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे बांग्लादेश जाकर उसे वापस लाने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले में सहायता की मांग की है ताकि इकबाल को सुरक्षित भारत लाया जा सके।
अब विदेश मंत्रालय से मांगी जा रही मदद:
खानपुर थाना अध्यक्ष के अनुसार, युवावस्था में मानसिक अस्थिरता के कारण इकबाल घर से भटक गया था और गलती से बांग्लादेश पहुंच गया। वहां इलाज के बाद उसकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ, जिसके बाद उसने अपना नाम और पता बताया। अब पुलिस और परिजन विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) एवं दूतावास से संपर्क में हैं ताकि औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर उसे वापस लाया जा सके। परिजन निवास, जन्म और पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कर रहे हैं, जिन्हें मंत्रालय को भेजा जाएगा।
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