खान बहादुर मंसूर अली की बरसी पर गोष्ठी, योगदान को किया गया याद

ग़ाज़ीपुर। अंजुमन इस्लाह कमसारोबार कमेटी (Anjuman Islaah Kamsarobar Committee) के संस्थापक और बाबा-ए-कौम के नाम से प्रसिद्ध खान बहादुर मंसूर अली खां की 91वीं बरसी के अवसर पर गोड़सरा में अबुलैस खां राजा ज़ाहिद ट्रस्ट (Abulais Khan Raja Zahid Trust) द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके जीवन, कार्यों और समाज के प्रति समर्पण पर अपने विचार रखे। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रबंध न्यासी मास्टर अबूजर खां ने की, जबकि संचालन हाजी एजाज अहमद खां ने किया।
समाज में अमूल्य योगदान पर चर्चा:
गोष्ठी में खान बहादुर मंसूर अली खां के परपोते और बदरुद्दीन मेमोरियल फाउंडेशन (Badruddin Memorial Foundation) के प्रबंध निदेशक शहाब खान गोड़सरावी ने उनके जीवन और समाज के उत्थान में किए गए योगदान को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि खान बहादुर मंसूर अली खां ने अपने कार्यों से समाज को नई दिशा दी। उन्होंने न केवल शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में योगदान दिया, बल्कि अपने कर्मों से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए।
ब्रिटिश काल में रहे रेलवे के उच्च अधिकारी:
खान बहादुर मंसूर अली खां ब्रिटिश शासनकाल के दौरान रेलवे के आला अधिकारियों में से एक थे। उनके कार्यकाल में उन्होंने ईमानदारी, समर्पण और निष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके नेतृत्व में रेलवे विभाग में कई सुधार हुए, जिनका प्रभाव लंबे समय तक देखा गया।
गोड़सरा में बनेगी ऐतिहासिक लाइब्रेरी:
गोष्ठी में मास्टर अबूजर खां ने बताया कि उन्होंने गोड़सरा में बनाई जा रही लाइब्रेरी का नाम खान बहादुर मंसूर अली खां के नाम पर रखा है। उन्होंने कहा कि यह गोड़सरा गांव की पहली लाइब्रेरी होगी, जो ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में नई रोशनी फैलाएगी। उम्मीद जताई गई कि यह ऐतिहासिक लाइब्रेरी अगले वर्ष से पूरी तरह शुरू हो जाएगी और समाज के लिए उपयोगी साबित होगी।
खान बहादुर मंसूर अली की वफ़ात और विरासत:
खान बहादुर मंसूर अली खां का निधन 19 अक्टूबर 1934 को लखनऊ (Lucknow) स्थित मंसूर मंजिल में हुआ था। उनके निधन के बाद भी समाज में उनके कार्यों की गूंज आज तक सुनाई देती है। उनकी विचारधारा और समाज के प्रति समर्पण आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
गांववासियों की बड़ी भागीदारी:
इस मौके पर गोड़सरा गांव के दर्जनों लोग मौजूद रहे और सभी ने खान बहादुर मंसूर अली खां के योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि उनकी विचारधारा और सेवाभाव को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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