नई दिल्ली (Delhi): राज्यसभा (Rajya Sabha) में नेता विपक्ष (Leader of Opposition, LoP) मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने पूर्व राज्यसभा चेयरमैन के अचानक जाने पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह बेहद अप्रत्याशित और दुखद अवसर था कि सदन को उन्हें विदाई देने का मौका नहीं मिल पाया। पूरे विपक्ष की ओर से उन्होंने उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना की।
अचानक विदाई का असर:
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पूर्व राज्यसभा चेयरमैन का अचानक जाना सदन की परंपरा और शिष्टाचार के लिहाज से एक चुनौतीपूर्ण स्थिति थी। उन्होंने सदन में सभी सांसदों से इस अप्रत्याशित परिस्थिति को समझने और पूर्व चेयरमैन के योगदान को सम्मान देने का अनुरोध किया।
विपक्ष की ओर से शुभकामनाएं:
खरगे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष सदन की गरिमा और लोकतंत्र के मूल्यों का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों को यह समझना चाहिए कि पूर्व चेयरमैन ने संसद की कार्यवाही में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उनका स्वस्थ जीवन सभी के लिए प्रेरणा है।
संसदीय शिष्टाचार का महत्व:
मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में जोर देकर कहा कि सांसदों को हमेशा पारदर्शिता और सम्मान के साथ कार्य करना चाहिए। सदन की कार्यप्रणाली में किसी भी तरह की अनावश्यक हड़बड़ी और असंवैधानिक कदम से बचा जाना चाहिए। उनका मानना है कि लोकतंत्र में शिष्टाचार का पालन करना हर सांसद की जिम्मेदारी है।
समापन टिप्पणी:
पूर्व राज्यसभा चेयरमैन की अचानक विदाई ने सदन में शोक का माहौल पैदा किया, लेकिन मल्लिकार्जुन खरगे ने सभी सांसदों से अपील की कि वे इस स्थिति को समझें और विपक्ष की ओर से उनके लिए शुभकामनाएं प्रकट करें। उनका यह बयान संसद में अनुशासन और सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता को दर्शाता है।
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