काशी के श्री काशी विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। पर्व की शुरुआत विधि-विधानपूर्वक गणेश पूजन के साथ की गई। किसी भी शुभ कार्य से पूर्व प्रथम पूज्य की आराधना की परंपरा के अनुसार धाम परिसर में विशेष पूजा-अर्चना आयोजित हुई, जिसमें महाशिवरात्रि महोत्सव के सफल और निर्विघ्न आयोजन की कामना की गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर नजर आया और वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज से संपूर्ण धाम भक्तिमय हो उठा।
मंदिर न्यास की ओर से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने धाम में विराजमान गौरी नंदन गणेश जी का विधिवत पूजन संपन्न कराया। पूजन के दौरान वस्त्र, पुष्प, दुर्वा, माला, नैवेद्य और विशेष भोग अर्पित किए गए। भावपूर्ण स्तुति के उपरांत आरती कर विघ्नविनाशक से महाशिवरात्रि महोत्सव को शांतिपूर्ण और सफल बनाने की प्रार्थना की गई।
गणेश पूजन से मिला पर्व को आध्यात्मिक आधार:
गणेश पूजन के साथ ही श्री काशी विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि महोत्सव का विधिवत आगाज माना जा रहा है। काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। इस पर्व पर देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन और पूजन के लिए वाराणसी पहुंचते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह काशी की सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत स्वरूप भी है।
प्रधान विग्रहों का रुद्राभिषेक होगा आरंभ:
शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप अगले चरण में मंदिर परिसर में स्थित सभी प्रधान विग्रहों का रुद्राभिषेक किया जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से देव विग्रहों को जागृत कर उनकी विधिवत आराधना की जाएगी। रुद्राभिषेक के साथ ही समस्त देवताओं का आह्वान किया जाएगा ताकि वे महाशिवरात्रि महोत्सव में सहभागी बनें और श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाएं। यह परंपरा वर्षों से काशी में निभाई जाती रही है और इसे महोत्सव की आत्मा माना जाता है।
सजावट और व्यवस्थाओं में जुटा मंदिर प्रशासन:
महाशिवरात्रि को लेकर धाम परिसर में व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। रंग-बिरंगी लाइटों और सुगंधित फूलों से मंदिर परिसर को भव्य रूप दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा व्यवस्थाएं सुदृढ़ की जा रही हैं। दर्शन पंक्ति, प्रवेश और निकास मार्गों को सुव्यवस्थित किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मथुरा से आएगा बाबा का विवाह श्रृंगार:
महाशिवरात्रि पर्व पर बाबा काशी विश्वनाथ के विवाह की परंपरा भी निभाई जाती है। इसी क्रम में भगवान शिव के विवाह में प्रयुक्त होने वाली सामग्री मथुरा (Mathura) से काशी भेजी जाएगी। इसमें नेग-पंचमेवा, फलाहारी चढ़ावा, विशेष वस्त्र, आभूषण और श्रृंगार से जुड़ी अन्य सामग्रियां शामिल होंगी। यह सभी वस्तुएं भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में विशेष रूप से तैयार की गई हैं।
आठ फरवरी को सूर्योदय के बाद सजी हुई एक विशेष ट्रक से यह विवाह सामग्री वाराणसी (Varanasi) के लिए रवाना की जाएगी। अगले दिन नौ फरवरी को यह सामग्री श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचेगी। ब्रजवासी इस अवसर पर हरि-हर के स्वरूप का साक्षात्कार करते हुए पुष्पवर्षा के साथ विवाह सामग्री को विदा करेंगे। यह दृश्य धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह:
महाशिवरात्रि की तैयारियों के शुभारंभ की सूचना मिलते ही श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। धाम परिसर में आने वाले भक्त इस पर्व को लेकर खासा उत्साहित हैं और बाबा विश्वनाथ के दर्शन की तैयारी में जुट गए हैं। काशी एक बार फिर शिवमय वातावरण में डूबने को तैयार है, जहां हर ओर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते नजर आएंगे।
धार्मिक परंपरा और आस्था का संगम:
महाशिवरात्रि का पर्व काशी में केवल एक तिथि नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और परंपरा का संगम है। गणेश पूजन से लेकर रुद्राभिषेक, धाम की सजावट और बाबा के विवाह की रस्मों तक, हर चरण में सनातन संस्कृति की झलक दिखाई देती है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी की जा रही हैं ताकि श्रद्धालु बिना किसी व्यवधान के इस पावन पर्व का साक्षी बन सकें।
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
#Mahashivratri,#KashiVishwanath,#Varanasi,#ShivMahayagya,#ReligiousFestival