महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित दादा पवार के निधन के बाद उनकी अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन किया जा रहा है। इसी क्रम में उनका अस्थि कलश वाराणसी (Varanasi) पहुंचा, जहां अस्सी घाट पर श्रद्धा और शोक के माहौल में अंतिम धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। मिर्जापुर (Mirzapur) से आए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकर्ताओं ने हरिशचंद्र घाट के सामने गंगा में अस्थि विसर्जन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने गंगा तट पर नम आंखों से अजित दादा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मिर्जापुर निवासी एनसीपी कार्यकर्ता अरुण दुबे ने बताया कि आज अजित दादा के निधन का दसवां दिन है। इसी परंपरा के अनुसार अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम तय किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी के तहत वे मिर्जापुर से अस्थि कलश लेकर काशी पहुंचे। अस्सी घाट पर विधिवत पूजन-अर्चन के बाद हरिशचंद्र घाट के सामने गंगा में अस्थि विसर्जन किया गया।
दिल्ली से मिर्जापुर और फिर काशी तक की यात्रा:
अरुण दुबे ने बताया कि अस्थि कलश लेने के लिए वे पहले दिल्ली (Delhi) गए थे। वहां से कलश प्राप्त करने के बाद वे मिर्जापुर लौटे। मिर्जापुर में अस्थि कलश के आगमन पर शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने अजित दादा के योगदान को याद किया। शोक सभा के बाद पूरे विधि-विधान के साथ अस्थि कलश को वाराणसी लाया गया। इस यात्रा के दौरान जगह-जगह कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
देशभर में अस्थि विसर्जन की परंपरा:
अरुण दुबे ने कहा कि अजित पवार को महाराष्ट्र में स्नेहपूर्वक अजित दादा कहा जाता था। उनका अचानक निधन न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका नेतृत्व और विचारधारा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं थी। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक उनके समर्थक और चाहने वाले मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि बहुत से लोग अजित पवार के अंतिम दर्शन नहीं कर सके थे। इसी कारण परिजनों के आग्रह पर उनकी अस्थियों को देश की प्रमुख और पवित्र नदियों में विसर्जित किया जा रहा है, ताकि हर क्षेत्र के लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें।
एनसीपी कार्यकर्ताओं की भावुक मौजूदगी:
अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस (NCP Youth Wing) के सदस्य और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने गंगा तट पर मौन रखकर दिवंगत नेता को याद किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि अजित दादा का राजनीतिक और सामाजिक योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनका जीवन संघर्ष, संगठन और जनता से जुड़ाव का प्रतीक रहा है।
विमान हादसे में हुआ था निधन:
अजित पवार का निधन 28 जनवरी को बारामती (Baramati) एयरपोर्ट पर हुए एक विमान हादसे में हुआ था। यह दुर्घटना उस समय हुई, जब चार्टर्ड विमान लैंडिंग की कोशिश कर रहा था। बताया गया कि विमान रनवे से पहले गिर गया, जिसके बाद उसमें आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में अजित पवार के साथ दो पायलट, एक महिला क्रू मेंबर और एक सुरक्षाकर्मी समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई थी। हादसे से जुड़ा एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया था, जिसमें विमान को गिरते हुए देखा गया।
श्रद्धांजलि के साथ अंतिम विदाई:
काशी में हुए अस्थि विसर्जन के दौरान पूरा वातावरण शोक और श्रद्धा से भरा रहा। गंगा की लहरों में अस्थियों के प्रवाहित होते समय कार्यकर्ताओं ने अजित दादा के व्यक्तित्व और योगदान को याद किया। सभी ने यही कामना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहें।
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