मानसिक दिव्यांगता के खिलाफ शुरू हुई जंग में आहूति डालते हुए लखनऊ के ‘द होप फाउंडेशन’ द्वारा संचालित ‘द होप रिहैबिलिटेशन एंड लर्निंग सेंटर’ की तरफ से पूरे साल (तीन दिसंबर 2024 से तीन दिसंबर 2025) तक कैंप का आयोजन किया जाएगा। सेंटर के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु कुमार ने बताया कि इस कैम्प के तहत कोई भी व्यक्ति या मरीज का फ्री अस्सेस्मेंट किया जाएगा। चार दिन की मुफ्त थेरेपी दी जाएगी। फ्री कंसल्टेशन दिया जाएगा। इस जन-जागरूकता अभियान के तहत समाज में ये सुनिश्चित किया जाएगा कि थेरेपी के माध्यम से मानसिक विकारों पार काफी हद तक जीत पाई जा सकती है। समाज को इस बात के लिए भी जागरूक किया जाएगा कि मानसिक दिव्यांगता लाइलाज नहीं है। सही जानकारी और सही इलाज के माध्यम से इससे जूझ रहे मरीज को ठीक कर समाज की मुख्य धरा से जोड़ा जा सकता है।
दिव्यांशु कुमार ने बताया, हम प्रोफेशनल थेरापिस्ट की टीम के साथ इस मुहिम की शुरुआत कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य यही हैं कि नई पीढ़ी को मानसिक दिव्यांगता और मानसिक विकारों से निजात दिला सकें। हमने यह भी नोटिस किया है कि मानसिक विकारों से जूझ रहे बच्चों को नार्मल स्कूल में एडमिशन मिलने में काफी दिक्कतें होती है। बच्चों का एकेडमिक भी सुचारू रूप से चलता रहे, इसके लिए हमनें स्कूल रेडिनेंस प्रोग्राम भी चलाया है. द होप ग्लोबल प्ले स्कूल इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने बताया कि द होप रिहैबिलिटेशन एंड लर्निंग सेंटर की स्थापना 10 फ़रवरी 2020 को हुई थी। पिछले चार सालों से हमारा एक ही लक्ष्य है कि मानसिक रूप से पीड़ित जो भी बच्चा हमारे पास आ रहा है उसे सही थेरेपी देकर मुख्य धारा से जोड़ा जाए। हमें बड़ी कामयाबी भी मिली है। 40 से ज्यादा बच्चों को हमने मेनस्ट्रीम से जोड़ दिया है। ये 40 बच्चे नार्मल स्कूल में शिक्षा-दीक्षा ग्रहण कर रहे हैं और समाज में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। अब हमारा लक्ष्य है कि मानसिक दिव्यांगता के बढ़ते ग्राफ को कम किया जाये। हमारी रणनीति तैयार है और प्रोफेशनल टीम के साथ हम इस लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल कर लेंगे।
