रिपोर्टर: अनुज कुमार
लखनऊ [Lucknow] में उत्तर प्रदेश [Uttar Pradesh] सरकार ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए “यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम” का आयोजन किया। यह कार्यक्रम पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह [Jaiveer Singh] की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय [Uttar Pradesh State Archaeology Department] द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सांस्कृतिक धरोहर के महत्व से परिचित कराना और उन्हें संरक्षण के लिए नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना था। इतिहास संस्थान, नई दिल्ली [Institute of History, New Delhi] के सहयोग से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

शैक्षणिक भ्रमण से बढ़ी ऐतिहासिक समझ:
कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 70 छात्र-छात्राओं को राजधानी लखनऊ की छतर मंजिल [Chhatar Manzil] और जनरल कोठी [General Kothi, Kaiserbagh] का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों ने इन स्थलों के इतिहास, स्थापत्य शैली और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सीधे अनुभव किया। भ्रमण के दौरान जानकारी सरल और स्पष्ट भाषा में दी गई, ताकि छात्र इन धरोहरों को बेहतर तरीके से समझ सकें और उनके महत्व को महसूस कर सकें।
विरासत संरक्षण में युवाओं की भूमिका:
कार्यक्रम के दौरान निदेशक सुश्री रेनू द्विवेदी [Renu Dwivedi] ने विद्यार्थियों को विरासत की परिभाषा, स्वरूप, प्रकृति और उसकी पहचान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने संवाद के माध्यम से समझाया कि सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। छात्रों को अपनी विरासत के प्रति जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया गया।

मंत्री जयवीर सिंह का संदेश:
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह [Jaiveer Singh] ने कहा, “इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण कराना नहीं है, बल्कि युवाओं को अपनी विरासत से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। ताकि वे इन धरोहरों को समझें और उन पर गर्व करें। विरासत केवल अतीत की याद नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भविष्य की दिशा भी है। इसलिए युवा पीढ़ी जागरूक और संवेदनशील बनकर सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।”
छात्रों और शिक्षा संस्थानों की भागीदारी:
कार्यक्रम में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय [Jai Prakash Narayan Sarvodaya Balak School] और जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय [Jai Prakash Narayan Sarvodaya Balika School] के कक्षा 9वीं और 11वीं के लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। साथ ही इतिहास संस्थान [Institute of History] से सुश्री सुयशा [Suyasha] और पुरातत्व निदेशालय [Archaeology Department] के अधिकारी, शिक्षकगण और विद्यालय के कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
युवाओं को विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण कदम:
यह कार्यक्रम युवाओं को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, ऐतिहासिक स्थलों के महत्व को समझाने और उन्हें संरक्षण के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। छात्र-छात्राओं ने न केवल ऐतिहासिक स्थलों का अनुभव किया बल्कि विरासत संरक्षण की जिम्मेदारी और महत्व को भी सीखा।
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