उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में जीएसटी कर चोरी के एक बड़े संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। साइबर सेल सर्विलांस टीम और थाना इंटौंजा (Itaunja Police Station) की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर लगभग पौने तीन करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस प्रकरण में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
फर्जी फर्म बनाकर की जाती थी कर चोरी:
जांच में सामने आया कि गिरोह द्वारा 15 से अधिक बोगस फर्म तैयार की गई थीं। इन फर्मों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में धोखाधड़ी की जाती थी। आरोप है कि फर्जी बिलों के आधार पर कर लाभ प्राप्त कर उसे अन्य लोगों को लगभग एक प्रतिशत कमीशन पर बेचा जाता था। इस तरीके से राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
गरीबों के दस्तावेजों का दुरुपयोग:
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 से 20 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते और मोबाइल नंबर प्राप्त करते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी किरायानामा तैयार कर जीएसटी पंजीकरण कराया जाता था। बाद में इन फर्मों के नाम पर लेन-देन दिखाकर कर चोरी की जाती थी।
संयुक्त कार्रवाई में चार गिरफ्तार:
इस मामले में तबस्सुम उर्फ जाह्नवी, प्रशांत, सुमित और दौलतराम को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, ये सभी गिरोह के सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं। गिरफ्तारी के दौरान इनके पास से 20 डेबिट कार्ड, 26 से अधिक सिम कार्ड, 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और 136 फर्जी बिल बरामद किए गए हैं।
साइबर सेल और थाना इंटौंजा की भूमिका:
साइबर सेल (Cyber Cell) सर्विलांस टीम और थाना इंटौंजा (Itaunja Police Station) की संयुक्त जांच में इस संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ। तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर गिरोह की गतिविधियों का पता लगाया गया। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है और यह भी देखा जा रहा है कि इस प्रकरण में अन्य लोग भी शामिल तो नहीं हैं।
आईटीसी फ्रॉड का बड़ा खुलासा:
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि फर्जी फर्मों के माध्यम से आईटीसी फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा था। फर्जी बिलिंग और कागजी लेन-देन दिखाकर कर लाभ प्राप्त किया जाता था। इसके बाद इस लाभ को कमीशन के आधार पर अन्य कारोबारियों को उपलब्ध कराया जाता था। पुलिस के अनुसार, यह एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है जिसकी परतें लगातार खोली जा रही हैं।
आगे की जांच जारी:
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। बरामद दस्तावेजों और उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में वित्तीय लेन-देन की विस्तृत पड़ताल की जाएगी ताकि कर चोरी की वास्तविक राशि और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी लालच में आकर अपने दस्तावेज किसी अज्ञात व्यक्ति को न दें, क्योंकि ऐसे मामलों में उनका दुरुपयोग हो सकता है।
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