लखनऊ (Lucknow) के फैजुल्लागंज इलाके में भारी बारिश के बाद जलभराव की समस्या ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दाउदनगर और मामा चौराहे के पास हालात बाढ़ जैसे हो गए हैं। सड़कों और गलियों में कई फीट तक पानी भरने के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में जलभराव से राहत के लिए करीब 43 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद समस्या खत्म नहीं हुई है। हालात बिगड़ने पर कई लोग अपना जरूरी सामान लेकर घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
चार फीट तक पानी, घरों में घुसने लगा पानी:
बारिश के बाद पुराना दाउदनगर और आसपास की सड़कें पानी में डूबी हुई हैं। कई दर्जन मकान जलभराव की चपेट में आ गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क पर करीब चार फीट तक पानी भर गया है। कुछ घरों के अंदर भी पानी पहुंच गया है, जबकि कई अन्य मकानों में पानी घुसने का खतरा बना हुआ है।
जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर है कि कई परिवार घरों में ही कैद होकर रह गए हैं। लोगों के लिए घर से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया है। जरूरी सामान को सुरक्षित रखने के लिए भी परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कुछ लोग स्थिति बिगड़ने पर घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी जलभराव की चपेट में:
फैजुल्लागंज के पुराना दाउदनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी बारिश के पानी से प्रभावित हो गया है। केंद्र के अंदर तक पानी पहुंच गया है। वर्ष 2024 में पुराना दाउदनगर, फैजुल्लागंज में इस अस्पताल का शिलान्यास हुआ था और यहां मरीजों को देखा जाता था। लेकिन जलभराव के कारण अब चिकित्सकों के पहुंचने में भी परेशानी हो रही है।
स्वास्थ्य केंद्र के अंदर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। वहीं, नवीन स्वास्थ्य भवन की बेसमेंट में भी पानी भर गया है। बारिश और जलभराव के कारण स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था प्रभावित होने से आसपास के लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
बच्चों को स्कूल भेजना भी हुआ मुश्किल:
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव के कारण वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। सड़क और गलियों में पानी भरा होने के चलते बच्चों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। लोगों का कहना है कि फिलहाल घर में मौजूद राशन और पानी से ही किसी तरह गुजारा करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब जरूरत का सामान खत्म हो जाता है तो पानी के बीच से होकर सड़क पार करनी पड़ती है। इसके बाद जरूरी सामान लेकर वापस घर पहुंचना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था करने में हो रही है।
शिकायतों के बाद भी स्थायी समाधान नहीं:
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव की समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और विधायक से शिकायत की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। लोगों के मुताबिक, जब नगर निगम (Nagar Nigam) में शिकायत की जाती है तो पानी निकालने के लिए एक ट्यूबवेल भेज दिया जाता है।
लोगों का कहना है कि ट्यूबवेल के जरिए पानी निकालने की कार्रवाई कुछ समय के लिए राहत देती है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। पानी निकलने के बाद भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती और बारिश होने पर हालात फिर बिगड़ जाते हैं।
43 करोड़ खर्च के बाद भी समस्या बरकरार:
फैजुल्लागंज में जलभराव की मौजूदा स्थिति ने क्षेत्र में खर्च किए गए 43 करोड़ रुपये के बावजूद समस्या के समाधान को लेकर सवाल खड़े किए हैं। दाउदनगर और मामा चौराहे के आसपास बारिश के बाद सड़कें और गलियां पानी में डूब रही हैं।
एक तरफ कई घरों में पानी पहुंचने का खतरा बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी जलभराव से प्रभावित है। बच्चों की पढ़ाई, लोगों की आवाजाही और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी इसका असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासी जलभराव की समस्या से स्थायी राहत चाहते हैं, ताकि बारिश के दौरान बार-बार ऐसे हालात का सामना न करना पड़े।
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