Video: लखनऊ में संदिग्ध आतंकियों की पेशी, ATS कमांडो की सुरक्षा में अदालत में पेश किए गए
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में आतंकी साजिश से जुड़े मामले में गिरफ्तार किए गए चारों संदिग्धों को एनआईए कोर्ट (NIA Court) में पेश किया गया। एटीएस (ATS) कमांडो की कड़ी सुरक्षा के बीच साकिब, विकास गहलावत, लोकेश और अरबाब को कोर्ट लाया गया, जहां एजेंसी ने उनसे पूछताछ के लिए रिमांड की मांग करने की तैयारी की है। इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और कार्रवाई को एक बार फिर सामने ला दिया है।
एटीएस की कार्रवाई और गिरफ्तारी का घटनाक्रम:
उत्तर प्रदेश एटीएस (UP ATS) द्वारा किए गए खुलासे के अनुसार, यह गिरोह देश में दहशत और अस्थिरता फैलाने की साजिश में सक्रिय था। गिरोह के सरगना मेरठ (Meerut) निवासी साकिब उर्फ शाकिब के साथ विकास गहलावत, लोकेश और अरबाब को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि यह सभी आरोपी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे और उनके निर्देश पर काम कर रहे थे।
पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क के आरोप:
जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य टेलीग्राम (Telegram), इंस्टाग्राम (Instagram) और सिग्नल (Signal) जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तान से जुड़े हैंडलर्स और संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े थे। इन माध्यमों का इस्तेमाल गुप्त बातचीत और योजनाओं के आदान-प्रदान के लिए किया जा रहा था। आरोप है कि इन्हीं चैनलों के जरिए उन्हें देशविरोधी गतिविधियों के लिए उकसाया जा रहा था।
महत्वपूर्ण ठिकानों की रेकी और साजिश:
एटीएस के अनुसार, यह गिरोह देश के प्रमुख संस्थानों, रेलवे सिग्नल बॉक्स, वाहनों और भीड़भाड़ वाले स्थानों की रेकी कर रहा था। गाजियाबाद (Ghaziabad), अलीगढ़ (Aligarh) और लखनऊ (Lucknow) जैसे शहरों में कई जगहों का निरीक्षण कर वीडियो तैयार किए गए, जिन्हें विदेशी हैंडलर्स को भेजा जाता था। आरोपियों का मकसद इन स्थानों को नुकसान पहुंचाकर भय और असुरक्षा का माहौल बनाना था।
लखनऊ रेलवे स्टेशन को बनाया था निशाना:
जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरोह ने लखनऊ रेलवे स्टेशन के आसपास रेलवे सिग्नल बॉक्स और अन्य संपत्तियों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। आगजनी और विस्फोट जैसी घटनाओं के जरिए बड़े नुकसान की साजिश रची जा रही थी। हालांकि, समय रहते एटीएस को सूचना मिल गई और टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आर्थिक लाभ के लिए की जा रही थीं गतिविधियां:
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह छोटे स्तर पर आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर उनके वीडियो बनाता था और उन्हें विदेशी हैंडलर्स को भेजता था। इसके बदले में क्यूआर कोड (QR Code) के माध्यम से उन्हें पैसे भेजे जाते थे। इस तरह यह नेटवर्क दहशत फैलाने के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी अर्जित कर रहा था।
बरामदगी और आगे की जांच:
गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक केन में ज्वलनशील पदार्थ, सात स्मार्टफोन और 24 पंपलेट बरामद किए गए हैं। इन मोबाइल फोन से कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना है, जिनकी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि इससे जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा सके।
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, कार्रवाई जारी:
इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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