सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी: पत्नी ने SC में उठाया सवाल

ब्यूरो डेस्क

लेह हिंसा के आरोप में गिरफ्तार सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में अपने पति की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए हेबियस कार्पस याचिका दायर की है। अंगमो ने दावा किया कि वांगचुक की गिरफ्तारी अवैध है और उन्हें हिरासत में रखने के कारण और स्वास्थ्य की जानकारी तक नहीं दी जा रही। वांगचुक फिलहाल जोधपुर जेल में हैं, उन्हें 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी।



हिरासत और याचिका का विवरण:


गीतांजलि ने 2 अक्टूबर को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि एक हफ्ता बीत जाने के बावजूद उन्हें पति की सेहत और गिरफ्तारी की वजह के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उनके वकील सर्वम ऋतम खरे के माध्यम से दायर याचिका में वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी गई है और तुरंत रिहाई की मांग की गई है।

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पर सवाल:


अंगमो ने वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हिरासत आदेश की कॉपी अभी तक उन्हें नहीं मिली, जो नियमों का उल्लंघन है।

हेबियस कार्पस क्या है:


हेबियस कार्पस एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसका अर्थ है “शरीर सामने लाओ”। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने पर अदालत के सामने पेश कराना है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत यह अधिकार हर नागरिक को प्राप्त है। आदेश मिलने के बाद पुलिस को हिरासत और गिरफ्तारी की पूरी जानकारी कोर्ट में देनी होती है।

लेह में कर्फ्यू और आम जीवन:


लेह में 9 दिन के बाद कर्फ्यू में ढील दी गई है। दुकानों को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खोलने की अनुमति मिली है और स्कूल कई दिनों के बाद फिर से खुले हैं। मिनी बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी दोबारा शुरू हो गए हैं।

अंगमो की पत्रवाहिनी:


गीतांजलि ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, गृह मंत्री, लद्दाख उपराज्यपाल, कानून मंत्री और लेह कलेक्टर को लेटर लिखकर पति की रिहाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक को शांतिपूर्वक काम करने वाले होने के बावजूद पिछले महीने से उनके खिलाफ विच हंट शुरू किया गया है।

सोनम की गिरफ्तारी पर पत्नी के रिएक्शन:


28 सितंबर को उन्होंने कहा कि वांगचुक हमेशा गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन करते रहे हैं और 24 सितंबर की हिंसा के लिए CRPF जिम्मेदार हैं। 1 अक्टूबर को राष्ट्रपति को लेटर भेजकर बिना शर्त रिहाई की मांग की। 2 अक्टूबर को X पर पोस्ट में उन्होंने लिखा कि प्रशासन और पुलिस के दुरुपयोग के कारण 3 लाख लद्दाखियों पर अत्याचार किया जा रहा है और पूछा कि क्या भारत सचमुच आजाद है।

जेल में अन्य आंदोलनकारी:


सोनम के अलावा लेह की स्थानीय जेल में बंद 56 आंदोलनकारियों में से 26 को 2 अक्टूबर को छोड़ दिया गया। गंभीर धाराओं वाले 30 लोग अभी भी जेल में हैं।

गीतांजलि जे अंगमो की यह याचिका और पत्रवाहिनी बताती है कि वांगचुक की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर परिवार गंभीर चिंतित है और सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है।

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