उत्तर प्रदेश के गाजीपुर (Ghazipur) जिले में जिला अधिवक्ता कल्याण समिति और विधिक जागरूकता संस्था बी-लीगल (B-Legal) के संयुक्त तत्वावधान में संचालित “नो योर राइट्स कैंपेन” के अंतर्गत लोक भारती इंटर कॉलेज (Lok Bharti Inter College) में विधिक जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों, विशेष रूप से शिक्षा के अधिकार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। सेमिनार के दौरान वक्ताओं ने बच्चों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।

संविधान और शिक्षा अधिकार पर दी जानकारी:
सेमिनार में उपस्थित आर एन सिद्दकी ने विद्यार्थियों को भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों की जानकारी देते हुए बताया कि संविधान प्रत्येक बच्चे को समान अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि संविधान के मौलिक अधिकारों के तहत बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए किसी प्रकार का शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों के लिए मुफ्त और उचित शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और उनका सही तरीके से उपयोग करने की सलाह दी।
आर्टिकल 21A को बताया शिक्षा का आधार:
वाराणसी (Varanasi) न्यायालय के अधिवक्ता धनंजय सिंह ने शिक्षा के मौलिक अधिकार पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान का आर्टिकल 21A छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि यह कानून सुनिश्चित करता है कि कोई भी बच्चा आर्थिक या सामाजिक कारणों से प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रहे। वक्ताओं ने बताया कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।

RTE Act 2009 की विशेषताओं पर चर्चा:
जिला न्यायालय गाजीपुर (Ghazipur District Court) के अधिवक्ता राकेश कुमार ने कहा कि आर्टिकल 21A को भारतीय संविधान के 86वें संशोधन अधिनियम 2002 के तहत जोड़ा गया था। इसे लागू करने के लिए भारत सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानी आरटीई एक्ट (RTE Act) 2009 पारित किया, जो 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि यह अधिनियम बच्चों के बेहतर भविष्य और समान शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शिक्षा को बताया सम्मानजनक जीवन का आधार:
अधिवक्ता चंद्र मोहन सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व, ज्ञान, संस्कार और जीवन जीने की दिशा को विकसित करती है। उन्होंने कहा कि जीवन का अधिकार केवल शारीरिक अस्तित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार भी देता है। ऐसे में शिक्षा समाज को मजबूत और जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा:
कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। छात्रों ने संविधान और शिक्षा अधिकार से जुड़े कई प्रश्न पूछे और उनके उत्तर दिए। इसके बाद “लिस्नर ऑफ द डे” का चयन किया गया। कक्षा 10 की छात्रा शिवानी यादव को उत्कृष्ट सहभागिता के लिए संविधान की प्रति देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की सराहना हुई:
प्रोफेसर आनंद कुशवाहा ने कहा कि बी-लीगल (B-Legal) संस्था का उद्देश्य लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि समाज में सशक्तता और जागरूकता का वातावरण तैयार हो सके। वहीं कॉलेज के प्रिंसिपल ओमप्रकाश यादव ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों में शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने सभी अधिवक्ताओं और आयोजन टीम का आभार भी व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डीके विश्वा ने किया।
#Ghazipur #EducationRights #Article21A #RTEAct #BLegal
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
