भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में आचार संहिता दरकिनार।

संवाददाता: विकास पठाक

जौनपुर। कलेक्ट्रेट में,भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में आचार संहिता दरकिनार। मालूम हो कि आदर्श आचार संहिता गुरूवार को उस समय उड़न छू कर दिया गया जब अधिकारी ने सत्ता धारी दल भाजपा प्रत्याशी के साथ निर्धारित व्यक्तियों से दोगुने से अधिक लोगों को भीतर प्रवेश करने की अनुमति ही नहीं दिया बल्कि उनको पहुंचाने भी नामांकन कक्ष तक भी गये । वहां मौजूद तमाम लोग और पत्रकार यह पक्षपातपूर्ण रवैया देखकर हैरत में रह गये, लेकिन सत्ताधारी दल भाजपा के प्रत्याशी और विधायक हंसते हुए आते और जाते समय खड़े होकर फोटोग्रामी कराये। कलेक्ट्रेट में यह प्रकरण पूरे दिन चर्चा-ए-आम रहा। विगत नौ अटूबर से कलेक्ट्रेट में नामांकन प्रक्रिया चल रही है लेकिन अब तक चुनाव की आचार संहिता का पूरी तरह से पालन किया गया। कलेक्ट्रेट के गेट पर सख्ती से जांच पड़ताल कर सपा प्रत्याशी लकी यादव तथा पूर्व सांसद व निर्दल प्रत्याशी के रूप में धनन्जय सिंह को उनके दो प्रस्तावकों के साथ ही गेट के भीतर प्रवेश करने दिया गया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी जब गेट में प्रवेश किये तो उनके साथ विधायक रमेश मिश्र, जलालपुर के ब्लाक प्रमुख संदीप सिंह तथा भाजपा के जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह, प्रत्याशी के दो प्रस्तावक व अधिवक्ता सहित अन्य एक को आचार संहिता को ताक पर रखते हुए अगवानी कर भीतर तक ले जाया गया। भाजपा के जिलाध्यक्ष गेट में प्रवेश करने के प्रत्याशी के साथ भीड़ देखकर जाने से कतराने लगे लेकिन वहां तैनात अतिरिक्त उपजिलाधिकारी मंगलेश दुबे उन्हे पकड़ कर व दबाव डालकर नामांकन कक्ष तक ले गये और अन्त तक विधायक और जिलाध्यक्ष से न जाने क्या बात करते रहे। कुछ पत्रकारों ने यह नजारा देखकर प्रवेश द्वार के पास मूक दर्शक होकर कुर्सी पर बैठे, अपर पुलिस अधीक्षक देहात त्रिभुवन सिंह से भाजपा प्रत्याशी के आचार संहिता की अवहेलना करने की शिकायत की गयी तो उन्होने कहा कि कुछ लोग पर्चा खरीदने गये है। जब पत्रकारों ने कहा कि विधायक ब्लाक प्रमुख तथा जिलाध्यक्ष मल्हनी विधान सभा के नहीं है वे प्रस्तावक भी नहीं हो सकते तो वे चुप हो गये। इस बारे में पूछे जाने पर उपजिलाधिकारी मंगलेश दुबे ने कहा कि पांच ही लोग भीतर गये थे और अधिक पूछे जाने पर वे भाग कर पुलिस के बीच जाकर बैठ गये। जिला और पुलिस प्रशासन का पक्षपात और यह नियम विरूद्ध चापलूसी देखकर तमाम लोग तरह तरह की चर्चा करने लगे। कुछ लोगों ने कहा कि आचार संहिता का पालन केवल विपक्षियों से कराया गया हैं। सत्ताधारी दल से नहीं।जिसकी लाठी उसकी भैस वाली कहावत चरितार्थ की गयी है।

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