राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह (Jayant Singh) 30 अगस्त को लखनऊ पहुंचेंगे। उनके दौरे को लेकर पार्टी की ओर से गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (Indira Gandhi Pratishthan) में संगठनात्मक और विचार-विमर्श बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी की सक्रियता बढ़ाने को लेकर चर्चा की जाएगी।
बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा पैदा करने और संगठनात्मक गतिविधियों को और प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श होगा। राष्ट्रीय लोकदल की ओर से प्रदेश में संगठन के विस्तार को लेकर लगातार गतिविधियां की जा रही हैं।
विभिन्न वर्गों को संगठन से जोड़ने पर जोर:
राष्ट्रीय लोकदल लगातार समाज के अलग-अलग वर्गों को पार्टी से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। पार्टी की ओर से विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के बीच अपनी विचारधारा और चौधरी चरण सिंह की सामाजिक न्याय तथा किसान हित की राजनीति को लेकर सकारात्मक वातावरण बनने का दावा किया गया है।
पार्टी के अनुसार, चौधरी जयंत सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग राष्ट्रीय लोकदल से जुड़ रहे हैं। लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज के साथ-साथ सवर्ण समाज के कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक चेहरे भी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लखनऊ में मानसून के मौसम के बीच राजनीतिक तापमान बढ़ने वाला है। इसे आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण गतिविधि के तौर पर देखा जा रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मणों पर नजर:
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के करीब आने के साथ ही ब्राह्मण समाज एक बार फिर राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण दिखाई दे रहा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी ब्राह्मण समाज को लेकर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई है।
पीडीए की राजनीति के लिए चर्चित अखिलेश यादव ने अब पीडीए में शामिल ‘पीडी’ की एक नई व्याख्या करते हुए इसे ‘पंडित’ बताया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापकों में शामिल जनेश्वर मिश्र की जयंती पर पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन में अखिलेश यादव ने कहा कि ‘पीडी’ का अर्थ पंडित है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाजवादी पार्टी के एजेंडे में पंडित भी शामिल हैं।
भाजपा पर निशाना साधने की कोशिश:
प्रबुद्ध सम्मेलन के दौरान अखिलेश यादव ने कानपुर के विकास दुबे के एनकाउंटर का उल्लेख करते हुए भाजपा को घेरने का प्रयास किया। इसके साथ ही उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) के विजन और उनकी स्मृतियों की कथित उपेक्षा का भी जिक्र किया।
अखिलेश यादव की ओर से ब्राह्मण समाज को लेकर किए जा रहे प्रयासों को उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। वहीं, राष्ट्रीय लोकदल भी ब्राह्मण और सवर्ण समाज के लोगों को संगठन से जोड़ने की बात कह रहा है।
ब्राह्मण मतदाताओं का चुनावी महत्व:
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज की आबादी 12 से 14 प्रतिशत के बीच मानी जाती है। यह समाज प्रदेश की करीब 115 से 120 विधानसभा सीटों की चुनावी गणित को प्रभावित करने की स्थिति में बताया जाता है। पूर्वांचल के कुछ जिलों में ब्राह्मण समाज की आबादी 20 प्रतिशत तक मानी जाती है।
इसी वजह से आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की नजर इस वर्ग पर बनी हुई है। राष्ट्रीय लोकदल की ओर से जहां संगठन में ब्राह्मण समाज की भागीदारी बढ़ाने की बात कही जा रही है, वहीं समाजवादी पार्टी भी इस वर्ग तक अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
नब्बे के दशक में बदला था राजनीतिक समीकरण:
दिए गए विवरण के मुताबिक, नब्बे के दशक में रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान कांग्रेस की नीतियों, फैसलों और रुख से नाराज ब्राह्मण समाज के एक बड़े हिस्से ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का समर्थन किया। इसके पीछे संस्कृति और सांस्कृतिक सरोकारों के प्रति ब्राह्मण समाज के झुकाव को प्रमुख कारण बताया गया।
इसी दौर में मुसलमानों के भी कांग्रेस से दूर होने का उल्लेख किया गया है। इसकी मुख्य वजह कांग्रेस की ओर से अपनाया गया असमंजस बताया गया है।
अक्टूबर 1990 में संतों के श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति और निर्माण के लिए कारसेवा करने अयोध्या जा रहे हिंदुओं की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद अयोध्या में कर्फ्यू लगाया गया। सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कई कारसेवकों की मृत्यु होने का भी उल्लेख इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में किया गया है।
आगामी चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। ऐसे में 30 अगस्त को लखनऊ में होने वाली राष्ट्रीय लोकदल की बैठक को संगठन विस्तार और विभिन्न सामाजिक वर्गों को पार्टी से जोड़ने की दिशा में अहम गतिविधि के तौर पर देखा जा रहा है।
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