UP: जननी सुरक्षा योजना में फर्जीवाड़ा…

क्या कोई महिला एक साल में पांच बार बच्चे को जन्म दे सकती है? नहीं न… लेकिन अगर ऐसा हो गया तो… अब आप ये मत कहिये कि ये संभव नहीं है. जब नियत में खोट हो तो सब कुछ संभव है लेकिन सफल नहीं. जनता के टैक्स के पैसों से सरकारी राजस्व भरता है और उसी पैसों से सुरक्षा, स्वास्थ्य, विकास जैसी योजनाओं को जमीन पर उतारा जाता है. अब बात प्रसव की है तो आपने गर्भवती महिलाओं के लिए सरकारी योजनाओं के विज्ञापन तो देखें ही होंगे. हो सकता है बाबू सोना और धर्म जाति में आपा खोना के बिच आप न देख पायें हों…

सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी रखा करें क्योंकि इन्ही योजनाओं से पता चलता है कि आपने जिसे सत्ता दी है वो आपको कितना भत्ता दे रहे हैं? और उसका लाभ आप तक पहुँच भी रहा है या नहीं? जब आप इसका ध्यान रखेंगें तो सच भी सामने आएगा कि सरकार के उपहार को कौन डकार गया?

अब सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए जननी सुरक्षा योजना का उपहार दिया ताकि महिलाओं को मदद मिल सके लेकिन इस योजना के तहत कुछ महिला एक साल में कई बार बच्चे को जन्म दे रही हैं, इन्होने तो प्रकृति को भी चुनौती दे दी है… यदि आप ऐसा सोच रहे हैं तो ऐसा बिलकुल नहीं है, इन्होने प्रकृति को नहीं सरकार को चुनौती दी है और सरकार की आँख में धुल झोंकर फर्जीवाड़े की इंतहा हुई है। एक महिला के 6 महीने में 10 बार प्रसव दर्शाकर सरकारी रकम खाते से निकाल ली गई। अधिकारी भी आंखों पर पट्टी बांध लाभार्थियों की संस्तुति करते रहे। ऐसी 20 से अधिक महिलाएं हैं, जिनके हर महीने या साल में 3-5 बार प्रसव दर्शाया गया है। एक ऐसा फर्जीवाड़ा जिसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए और विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पर कई सवाल खड़े कर दिए.

कैसे मिलता है योजना का लाभ?

दरअसल जननी सुरक्षा योजना का लाभ लेने के लिए एएनएम या आशा द्वारा गर्भवती का सीएचसी पर पंजीकरण कराया जाता है। टीकाकरण, अल्ट्रासाउंड समेत अन्य इलाज का विवरण डाटा एंट्री ऑपरेटर पोर्टल पर दर्ज करता है। सीएचसी पर प्रसव-नसबंदी के बाद लाभार्थी का आधार कार्ड और बैंक खाता संख्या की जानकारी दर्ज कर स्टाफ नर्स फाॅर्म भरती है। ब्लॉक लेखा प्रबंधक और ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी के सत्यापित करने पर चिकित्साधिकारी की संस्तुति के बाद भुगतान हो जाता है।

अब इस प्रोसेस को आप ध्यान में रखिये, अब आगे की कहानी… ये खबर आई उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद से. खबर के अनुसार जब आप आगरा-इटावा रोड पर जायेंगें तो वहां फतेहाबाद गांव का बोर्ड लगा दिखेगा। यहीं रहती हैं कृष्णा कुमारी। बताया जा रहा है कि यहाँ कागजों में उनकी 2.5 साल में 25 बार डिलीवरी दिखाई गयी है।

Janani Suraksha Yojana Scam Case

आगरा के फतेहाबाद में रहने वाली कृष्णा कुमारी का कहना है कि ‘मेरे दो बेटे हैं। पहला 2014 में हुआ, दूसरी डिलीवरी 2017 में हुई। इसके बाद मैंने नसबंदी करा ली। मुझे 8 अप्रैल को पता चला कि मेरी ढाई साल में 25 बार डिलीवरी हुई है। ऐसा कैसे हो सकता है? जो कागज मुझे दिखाए गए, उसके मुताबिक 5 बार मेरी नसबंदी भी करवा दी गई। यह काम मेरे बुआ के बेटे अशोक ने किया है। वह कागजों पर मेरा अंगूठा लगवाता था। किस बैंक में मेरे नाम से अकाउंट खुलवाया? कब और कितना पैसा निकाला, ये मुझे कभी पता नहीं चला। 3 से 6 महीने में वह 500 रुपए और एक थैले में चावल-चीनी दे जाता था।

बड़ा सवाल है कि स्वास्थ्य विभाग में यह घोटाला कैसे हुआ? इस खेल में अधिकारियों से लेकर कौन-कौन शामिल है? क्या ये केवल एक मामला है? तो जवाब है नहीं… कृष्णा कुमारी, अशोक का नाम लेती हैं और यही से जुड़ती जाती है फर्जीवाड़े की कड़ी.

कृष्णा कहती हैं- यह सब अशोक ने किया है। वह मेरी बुआ का बेटा है। वह महिला समूह चलाता है। करीब 8 साल पहले अशोक मेरे घर आया था। उसने कहा था कि तुमको सरकारी योजनाओं से पैसा दिला देंगे। बस बैंक में खाता खुलवा लो। अशोक ने मेरा आधार कार्ड लिया था। कुछ कागजों पर मेरा अंगूठा लगवाया था। मेरी तरह कुछ और महिलाओं से भी कागजों पर अंगूठा लगवाया था। इसके बाद से वह हर तीसरे या 6 महीने पर एक बार महिलाओं को अपने घर बुलाता था। कागजों पर अंगूठा लगवा कर बदले में 500 रुपए का घर का राशन देता था। हमने पूछा- आपके पास बैंक अकाउंट की कोई जानकारी है? वह कहती हैं- नहीं, मेरे पास पासबुक और खाते से जुड़ी कोई जानकारी नहीं। जो अधिकारी हमारे घर आए थे, उन्होंने बताया कि मेरे नाम पर बैंक ऑफ इंडिया में खाता खुलवाया गया था। खाते में मेरा मोबाइल नंबर अटैच नहीं किया गया, इसलिए पैसे जमा करने और निकालने के मैसेज नहीं मिलते थे।

खबर के अनुसार अशोक ने गांव की 50-60 महिलाओं के खाते खुलवाए हैं। वह सबको तीन या 6 महीने में बुलाकर राशन देता था। गांव के एक दूसरे व्यक्ति का कहना है कि उनकी पत्नी के साथ भी फर्जीवाड़ा हुआ। उसके खाते से 6 हजार रुपए निकलवा लिए थे। तब से मेरी पत्नी ने अशोक के पास जाना बंद कर दिया। उसके पास सिर्फ आस पास के क्षेत्र जैसे नगला कदम की ही नहीं, फतेहाबाद, बाह और जरार से 100 से ज्यादा महिलाएं आती थीं।

अब आइये समझते हैं कि ये मामला कहां से शुरू हुआ?

स्वास्थ्य विभाग ने वित्तीय वर्ष 2021–22 और 2022–23 में भुगतानों के ऑडिट कराए तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत जननी सुरक्षा योजना और महिला नसबंदी की प्रोत्साहन राशि में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। आगरा जिले के 18 CHC, लेडी लायल महिला अस्पताल और SN मेडिकल कॉलेज में योजना के तहत किए गए 38.95 लाख के भुगतान में गड़बड़ी मिलीं। इसमें प्रसव के लिए 27.54 लाख और नसबंदी के लिए 11.41 लाख रुपए का भुगतान किया गया। CHC फतेहाबाद का ऑडिट करने के दौरान टीम को कृष्णा कुमारी के नाम से कई रिकॉर्ड मिले। इनमें अलग-अलग कोड जनरेट कर 45 हजार रुपए का भुगतान किया गया था।

दरअसल NHM के तहत प्रसव कराने पर आर्थिक मदद मिलती है। जैसे …

  • ग्रामीण क्षेत्र की महिला को 1400 रुपए।
  • शहरी क्षेत्र की महिला को 1000 रुपए।
  • नसबंदी के लिए दोनों क्षेत्र की महिलाओं को 2000 रुपए।

CMO डॉ. अरुण श्रीवास्तव भी फतेहाबाद गांव पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि इस मामले में जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ FIR होगी। कृष्णा कुमारी के बयान दर्ज हुए। मौजूदा अधीक्षक प्रमोद कुशवाहा, ब्लॉक अकाउंट मैनेजर नीरज अवस्थी, डेटा ऑपरेटर गौतम और गौरव थापा के बयान भी दर्ज कराए गए।

CHC पर डिलीवरी और नसबंदी के भुगतान के लिए अधीक्षक, डॉक्टर, एएनएम, डेटा ऑपरेटर और आशा द्वारा सत्यापन किया जाता है। इसके बाद ही भुगतान होता है। फतेहाबाद CHC पर 2021-22, 2022-23 में डॉ. वीके सोनी, डॉ. देवेंद्र और डॉ. एके सिंह अधीक्षक रहे हैं। उनसे भी पूछताछ होगी।

वहीँ फतेहाबाद सामुदायिक स्वास्थ केंद्र के अधीक्षक प्रमोद कुशवाहा ने कहा- कई केस सामने आने के बाद अब लिस्ट तैयार की जा रही है। इस लिस्ट में दो, पांच से ज्यादा और 10 से ज्यादा डिलीवरी और नसबंदी वाली महिलाओं के नाम दर्ज किए जा रहे हैं।

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