जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमला, 26 की मौत – कई घायल…

दक्षिण कश्मीर के प्रमुख पर्यटक स्थल पहलगाम में मंगलवार को आतंकवादियों ने कायराना हरकत की है। आतंकियों ने अंधाधुंध गोली बारी की और 26 लोगों की जान ले ली। पीएम मोदी ने हमले की निंदा करते हुए दुख जताया है। 

बता दें पहलगाम में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक घूमने आते है। गर्मी के मौसम में पर्यटकों की संख्या अधिक रहती है। ऐसे में इस हमले के बाद प्रयटकों में डर का माहौल है। पिछले कुछ सालों में इस तरह का यह पहली घटना है जबकि आतंकियों की ओर से पर्यटकों को निशाना बनाया गया है। बता दें कि इस साल 3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली है। इससे पहले इस आतंकी हमले से सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कुछ मृतकों की पहचान हो गई है:

1. लेफ्टिनेंट विनय नरवाल

2. हिमांशी नरवाल

3. शालिंदर कल्पिया (गुजरात)

4. मंजूनाथ राव (कर्नाटक)

5. विदेशी टूरिस्ट (इटली

6. विदेशी टूरिस्ट संदीप नपवाने (नेपाल)

घायलों के नाम

1. विनो भट्ट (गुजरात)

2. एस बालचंद्रू (महाराष्ट्र)

3. अभिजवन राव (कर्नाटक)

4. संतरू (तमिलनाडु)

5. साहसी कुमारी (उड़ीसा)

6. डॉ. परमेश्वर

7. माणिक पाटिल

8. रिनो पांडे

इमरजेंसी हेल्प डेस्क नंबर

अनंतनाग पुलिस ने पर्यटकों के लिए दो हेल्पलाइन नंबर 9596777669 और 01932225870 जारी किए हैं। इसके अलावा वॉट्सऐप नंबर 9419051940 जारी किया गया है।

कहां हुआ हमला?
श्रीनगर से 90 किलोमीटर की दूरी पर है पहलगाम। यहां से छह किलोमीटर दूर है बायसरन घाटी, जहां पहुंचने में 30 मिनट का वक्त लगता है। इस जगह को ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ भी कहा जाता है। यहां घास के मैदान हैं। एक तरफ देवदार के घने जंगल हैं। यहां पर्यटक तुलियन झील तक ट्रैकिंग करने के लिए भी आते हैं। यहां पैदल रास्ते या खच्चरों पर बैठकर ही आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहीं पर हमला हुआ।

हमले के वक्त क्या कर रहे थे पर्यटक?
यहां अलग-अलग राज्यों के पर्यटक और विदेशी सैलानी मौजूद थे। घटनास्थल पर खानपान के कुछ ठिकाने बने हुए हैं। कुछ पर्यटक वहां भेलपुरी खा रहे थे। कुछ पर्यटक खच्चरों के जरिए आवाजाही कर रहे थे। कुछ मैदान में बैठकर पिकनिक कर रहे थे।

कैसे हुआ हमला?
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मंगलवार दोपहर तीन बजे जंगल के रास्ते सेना की वर्दी में आतंकी आए और उन्होंने पर्यटकों से परिचय-पत्र मांगना शुरू कर दिया। परिचय-पत्र से उन्होंने पर्यटकों का मजहब जाना। बताया जा रहा है कि जो पर्यटक हिंदू थे, आतंकियों ने उन्हें गोलियां मारनी शुरू कर दीं। हालांकि, मरने वालों में कुछ विदेशी भी हैं। स्थानीय दुकानदारों और पर्यटकों ने पेड़ों के पीछे जाकर अपनी जान बचाई।

किसने ली हमले की जिम्मेदारी?
आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। टीआरएफ, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन है। पाकिस्तान में बैठा शेख सज्जाद गुल टीआरएफ का प्रमुख है। टीआरएफ की कहानी 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले के साथ ही शुरू होती है। कहा जाता है कि इस हमले से पहले ही इस आतंकी संगठन ने घाटी के अंदर अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। जम्मू कश्मीर में हाल ही में 85 हजार से अधिक डोमिसाइल जारी किए गए हैं। टीआरएफ यह कहकर लोगों को भड़का रहा है कि ये डोमिसाइल स्थानीय लोगों को नहीं, बल्कि बाहरी लोगों को प्रदान किए गए हैं।

कहां से आए थे आतंकी?
घटनास्थल पर आतंकी देवदार के घने जंगलों के रास्ते आए थे। जानकारी के मुताबिक, यह माना जा रहा है कि आतंकी किश्तवाड़ के रास्ते आए और फिर कोकरनाग के जरिए दक्षिण कश्मीर के बायसरन पहुंचे। कुछ लोगों ने आतंकियों की संख्या पांच बताई है।

हमले के बाद कहां गए आतंकी?
जहां हमला हुआ, वहां पैदल रास्ते या खच्चरों के जरिए ही पहुंचा जा सकता है। जब तक सुरक्षा बल मौके पर पहुंचते, आतंकी कई पर्यटकों की हत्या कर पहाड़ियों की तरफ भाग निकले। उनके मारे जाने या पकड़े जाने की फिलहाल कोई सूचना नहीं है।

जानकारी के अनुसार, मौके पर सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाल लिया है। सेना के जवानों ने पहाड़ी इलाके को घेर लिया है। वहीं घायल पर्यटकों को इलाज के लिए भेजा गया है। घायल पर्यटकों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। इससे पहले 14 अप्रैल को सुरक्षा बलों ने लगभग 25 दिनों तक चले आतंकवाद विरोधी अभियान के बाद किश्तवाड़ जिले के छत्रू वन क्षेत्र में एक अत्यधिक परिष्कृत और सुनियोजित आतंकवादी ठिकाने का पता लगाया था।

12 अप्रैल को अखनूर एनकाउंटर

बीते 12 अप्रैल को जम्मू जिले के अखनूर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में 9 पंजाब रेजिमेंट के JCO कुलदीप चंद शहीद हो गए थे। अखनूर के केरी बट्टल इलाके में 11 अप्रैल की देर रात एनकाउंटर शुरू हुआ था। 11 अप्रैल को ही किश्तवाड़ जिले के घने जंगलों में एनकाउंटर के दौरान सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को मार गिराया था। अधिकारियों ने बताया कि मारे गए तीनों आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के हैं। इनमें टॉप कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल है।

शहीद JCO कुलदीप चंद

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