खामेनेई के जनाजे में न पीएम मोदी जाएंगे, न विदेश मंत्री; राज्यपाल और राज्यमंत्री क्यों भेज रहे, भारत की स्ट्रैटेजी क्या

ईरान (Iran) के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की हत्या के 131 दिन बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। इस अवसर पर ईरान (Iran) ने छह दिन के राजकीय जनाजे का आयोजन किया है, जिसमें दुनिया के कई देशों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। 23 जून को राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान (Masoud Pezeshkian) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को भी न्योता भेजा था। हालांकि, भारतीय और ईरानी सूत्रों के अनुसार भारत सरकार ने प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री के बजाय एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है। यह फैसला भारत की मौजूदा कूटनीतिक रणनीति और संतुलित विदेश नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल हैं?:

भारत की ओर से भेजे गए प्रतिनिधिमंडल में दो प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। पहली, बिहार (Bihar) के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन (Syed Ata Hasnain) हैं। उन्होंने वर्ष 1974 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir), सियाचिन (Siachen), पंजाब (Punjab), श्रीलंका (Sri Lanka) तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2010 में उन्होंने 15 कोर (Chinar Corps) की कमान संभाली। सेवानिवृत्ति के बाद वे सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर (Central University of Kashmir) के चांसलर रहे और बाद में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (National Disaster Management Authority) से भी जुड़े। वर्तमान में वे बिहार (Bihar) के राज्यपाल हैं। बताया जा रहा है कि शिया समुदाय से संबंध रखने और संवैधानिक पद पर होने के कारण उन्हें प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया गया है।

विदेश राज्यमंत्री को भी मिली जिम्मेदारी:

प्रतिनिधिमंडल के दूसरे सदस्य केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गरिटा (Pabitra Margherita) हैं। राजनीति में आने से पहले वे असमिया सिनेमा से जुड़े रहे और बाद में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) से जुड़े। संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद वे वर्ष 2022 में राज्यसभा पहुंचे। वर्तमान में वे विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) और कपड़ा मंत्रालय (Ministry of Textiles) में राज्य मंत्री हैं। माना जा रहा है कि विदेश मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ उनका प्रोफाइल भारत की मौजूदा कूटनीतिक नीति के अनुरूप है।

प्रधानमंत्री के शामिल न होने की बताई जा रही वजहें:

जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का कार्यक्रम पहले से तय है। एक से तीन जुलाई तक जापान (Japan) की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची (Sanae Takaichi) भारत दौरे पर रहेंगी, जिनसे उनकी मुलाकात प्रस्तावित है। इसके बाद चार जुलाई को उनका राजस्थान (Rajasthan) के जोधपुर (Jodhpur) का कार्यक्रम है, जबकि छह से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया (Indonesia), ऑस्ट्रेलिया (Australia) और न्यूजीलैंड (New Zealand) की यात्रा निर्धारित है।

विशेषज्ञों ने बताईं कूटनीतिक चुनौतियां:

मिडिल-ईस्ट स्टडीज (Middle-East Studies) के प्रोफेसर पीआर कुमारस्वामी (PR Kumaraswamy) और इंटरनेशनल स्टडीज (International Studies) के एसोसिएट प्रोफेसर राजन कुमार (Rajan Kumar) के अनुसार प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के अलावा कुछ कूटनीतिक पहलुओं पर भी चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हो सकता है। इसके अलावा भारत ने खामेनेई की मृत्यु के बाद प्रारंभिक चरण में सीमित सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी थी, इसलिए इस स्तर पर प्रधानमंत्री की उपस्थिति को अलग संदेश के रूप में देखा जा सकता था। साथ ही, भारत के अमेरिका (United States), इजराइल (Israel), सऊदी अरब (Saudi Arabia) और संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) जैसे साझेदार देशों के साथ संबंधों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

ईरान को लेकर भारत के सामने कई स्तर की चुनौती:

रिपोर्ट के अनुसार ईरान (Iran) से जुड़े हर फैसले में भारत को आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक पहलुओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते भारत के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा आता है। दूसरी ओर अमेरिका (United States) भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। इसके अलावा भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध भी लंबे समय से रहे हैं। वहीं रक्षा क्षेत्र में इजराइल (Israel) भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता है, जबकि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी रहते हैं। ऐसे में भारत की विदेश नीति इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ती है।

पूर्व अवसरों से अलग दिखा इस बार का फैसला:

वर्ष 1989 में ईरान (Iran) के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खुमैनी (Ali Khomeini) के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से तत्कालीन विदेश मंत्री पी. वी. नरसिंहा राव (P. V. Narasimha Rao) शामिल हुए थे। वहीं वर्ष 2024 में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी (Ebrahim Raisi) के निधन के बाद उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) अंतिम संस्कार में पहुंचे थे। इस बार भारत ने मंत्री स्तर से नीचे का प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है, जिसे विशेषज्ञ भारत की संतुलित कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।

चार जुलाई से शुरू होंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम:

जानकारी के अनुसार चार और पांच जुलाई को तेहरान (Tehran) में खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। छह जुलाई को राजधानी से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद सात जुलाई को पार्थिव शरीर को कोम (Qom) ले जाया जाएगा। आगे धार्मिक कार्यक्रमों के तहत नजफ (Najaf) और करबला (Karbala) भी ले जाने की योजना है। नौ जुलाई को पार्थिव शरीर मशहद (Mashhad) पहुंचाया जाएगा, जहां इमाम रजा (Imam Reza) की दरगाह परिसर में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

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