लखनऊ में आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का प्रदर्शन
लखनऊ में आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ सोमवार को बैंक कर्मचारियों ने सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। हजरतगंज स्थित आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के क्षेत्रीय कार्यालय पर आयोजित इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग उठाई। यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज (United Forum of IDBI Officers and Employees) के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन में बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के स्वरूप को बनाए रखने और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
निजीकरण की प्रक्रिया रोकने की मांग:
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि आईडीबीआई बैंक देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। ऐसे में बैंक के प्रस्तावित निजीकरण को लेकर कर्मचारियों ने अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और बैंक की सार्वजनिक क्षेत्र की पहचान को बरकरार रखा जाए।
सरकारी हिस्सेदारी को लेकर उठाया मुद्दा:
कर्मचारियों ने वर्ष 2003 में संसद में दिए गए उस आश्वासन का हवाला दिया, जिसमें बैंक में सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही गई थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस आश्वासन के अनुरूप सरकार को आईडीबीआई बैंक में न्यूनतम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंक की हिस्सेदारी को लेकर सरकार को अपने पुराने आश्वासन का पालन करना चाहिए।
सेवा शर्तों और पेंशन को लेकर चिंता:
धरना-प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने निजीकरण के संभावित प्रभावों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि बैंक के निजी हाथों में जाने की स्थिति में अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। कर्मचारियों ने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि आईडीबीआई बैंक का सार्वजनिक क्षेत्र का बैंकिंग चरित्र बनाए रखना जरूरी है। इसके साथ ही बैंक में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
2 और 3 नवंबर को देशव्यापी भूख हड़ताल का ऐलान:
यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने निजीकरण के विरोध में आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। यूनियन के मुताबिक, 2 और 3 नवंबर को देशभर में दो दिवसीय भूख हड़ताल की जाएगी। इसके जरिए बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जाएगा।
सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग:
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने केंद्र सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रोकने के साथ संसद, बैंक कर्मचारियों और आम जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि बैंक के भविष्य से जुड़े फैसलों में कर्मचारियों के हितों और सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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रिपोर्टर: संतोष कुमार