‘कृष्ण टेढ़े हैं’ बयान पर धीरेंद्र शास्त्री ने माफी मांगी:कहा- मेरे नाम में उनका नाम, बात को व्याख्या को तोड़-मरोड़ा गया
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विवादों में घिर गए हैं। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी (Shivpuri) में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं, जिन पर मथुरा (Mathura) के साधु-संतों ने नाराजगी जताई। वीडियो सामने आने के बाद संतों ने धीरेंद्र शास्त्री से माफी मांगने की मांग की। विवाद बढ़ने पर सोमवार को उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उनका भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण में भेद करने का कोई इरादा नहीं था।
श्रीराम और श्रीकृष्ण की तुलना से शुरू हुआ विवाद:
धीरेंद्र शास्त्री ने शिवपुरी में चल रही श्रीराम कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बांसुरी बजाने और उनकी त्रिभंगी मुद्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ठाकुरजी की तस्वीरों में उनका शरीर तीन जगह से झुका हुआ दिखाई देता है। उनके पैर एक-दूसरे के ऊपर होते हैं, कमर लचकती है और गर्दन टेढ़ी करके वे बांसुरी बजाते हैं। इसके विपरीत उन्होंने भगवान श्रीराम को सीधे खड़े होने वाले और उनके नाम, चाल-ढाल तथा स्वरूप को सीधा बताया।
उन्होंने आगे कहा कि पर्वत उठाना कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि उनके भगवान के भक्त ने पूरा पर्वत ही उड़ा दिया था। इस दौरान उन्होंने अयोध्या और वृंदावन का उल्लेख करते हुए भी दोनों की तुलना की। उनके इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद इसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति टिप्पणी के रूप में देखा गया और विवाद शुरू हो गया।
मथुरा के साधु-संतों ने जताई नाराजगी:
10 अक्टूबर को धीरेंद्र शास्त्री के बयान का वीडियो सामने आने के बाद मथुरा के साधु-संतों ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए धीरेंद्र शास्त्री से माफी मांगने को कहा। इसके बाद मामला चर्चा में आ गया। विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने सोमवार को अपनी सफाई पेश की और कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया है।
धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई में क्या कहा:
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कई लोगों ने उनकी बात का गलत मतलब निकाल लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्वयं ठाकुरजी और ब्रज के भक्त हैं। जब भी ठाकुरजी से प्रार्थना करते हैं तो उनसे ब्रज में वास मिलने की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि वह श्रीमद्भागवत कथा भी कहते हैं और ठाकुरजी का गुणगान करते हैं। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के बीच भेद करने का उनका कोई इरादा नहीं था।
उन्होंने अपने बयान की व्याख्या करते हुए कहा कि जिस तरह सखियां भगवान श्रीराम को और गोपियां ठाकुर श्रीकृष्ण को उलाहना देती हैं, उसी तरह कवि बिंदुजी महाराज ठाकुरजी और ब्रज के संत कोकिल सांई जी रघुनाथ जी को उलाहना देते हैं। इसी भाव में उन्होंने भी एक पद कहा था। उन्होंने संत के प्रचलित पद का उल्लेख करते हुए कहा, ‘बंसी बजाना तो खेल ही है, पर धनुष उठाना खेल नहीं।’
धीरेंद्र शास्त्री के मुताबिक, वह इसी पद की व्याख्या कर रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने पूरी वीडियो देखने के बजाय उसका आधा हिस्सा देखकर उन्हें कृष्ण विरोधी बता दिया। उन्होंने कहा कि वह भगवान श्रीकृष्ण के विरोधी नहीं हैं। श्रीकृष्ण उनके ठाकुरजी हैं और वह स्वयं कृष्ण जन्मभूमि के लिए बार-बार आवाज उठाते हैं। उनके नाम में भी भगवान श्रीकृष्ण का नाम जुड़ा है और उन्हीं की वजह से उनका जीवन है।
ठेस पहुंचने पर मांगी माफी:
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यदि उनकी बात, व्याख्या या भाव से किसी के मन को ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि उनकी बात का गलत अर्थ निकालकर उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश न किया जाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने समाज या भगवान को बांटने की कोशिश नहीं की है। भगवान को बांटने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि राम और कृष्ण दोनों एक ही हैं और उनमें कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बात उन्होंने भावुक होकर कही थी और सभी से उनकी भावना समझने की अपील की।
‘बंसी बजाना खेल, धनुष चलाना खेल नहीं’ वाली टिप्पणी:
विवादित बयान के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि बंसी बजाना तो खेल है, लेकिन धनुष चलाना खेल नहीं। कथा में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज ठाकुरजी की भी जय-जयकार हो रही है। इसके बाद उन्होंने बांसुरी बजा रहे कलाकार की ओर इशारा करते हुए कहा कि बांसुरी बजाना कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि उनके यहां भी कलाकार बांसुरी बजा रहा है।
इसके बाद बांसुरी वादक ने कुछ देर तक धुन सुनाई। धीरेंद्र शास्त्री ने कथा में मौजूद लोगों से भगवान राम को मानने वालों के हाथ उठाने को कहा और टिप्पणी की कि आज वे लोग फूले नहीं समाएंगे।
गाय चराने और पर्वत उठाने का भी किया था जिक्र:
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीकृष्ण के गाय चराने और गोवर्धन पर्वत उठाने का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि लोग कहेंगे कि उनके भगवान गाय चराते हैं, लेकिन गाय तो कोई भी चरा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गाय चराना खेल है, जबकि बंदरों को नचाना खेल नहीं।
गोवर्धन पर्वत उठाने के प्रसंग पर उन्होंने कहा था कि पर्वत उठाना कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि उनके भगवान के भक्त ने पूरा पर्वत ही उड़ा दिया था। उनका इशारा भगवान श्रीराम के भक्त हनुमान की ओर था। इन्हीं टिप्पणियों के सामने आने के बाद विवाद खड़ा हुआ और अब धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए भगवान राम और कृष्ण को एक बताया है।
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