हमीरपुर (Hamirpur) साइबर अपराध थाना पुलिस ने साइबर ठगी के दो मामलों का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 48 खाली सिम कार्ड, दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन और दो आधार कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी अलग-अलग कंपनियों में काम करते थे और कथित तौर पर पहचान संबंधी जानकारी जुटाने के लिए केवाईसी के नाम का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद इसी जानकारी के जरिए लोगों के साथ धोखाधड़ी किए जाने की बात सामने आई है।
दो साइबर ठगी के मामलों में कार्रवाई:
हमीरपुर साइबर अपराध थाना पुलिस ने 21 और 25 अगस्त को दर्ज साइबर ठगी के दो मामलों की जांच के दौरान यह कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित टीम को आरोपियों के संबंध में सूचना मिली थी।
मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कोतवाली नगर क्षेत्र में सिटी फॉरेस्ट के पास निर्माणाधीन पुल पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर गिरफ्तारी की गई।
दो युवकों को पुलिस ने किया गिरफ्तार:
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हमीरपुर के थाना सुमेरपुर क्षेत्र के ग्राम भौरा डांडा निवासी करीब 22 वर्षीय दीपक कुमार (Deepak Kumar) और जालौन (Jalaun) के कालपी थाना क्षेत्र के ग्राम देवपुरा निवासी करीब 26 वर्षीय विक्रांत सिंह (Vikrant Singh) के रूप में हुई है।
दोनों आरोपियों को पुलिस ने साइबर ठगी के मामलों की जांच के दौरान गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके कब्जे से कई सामान बरामद किए, जिन्हें मामले की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
48 खाली सिम कार्ड और मोबाइल बरामद:
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 48 खाली सिम कार्ड, नथिंग कंपनी (Nothing) के दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन और दो आधार कार्ड बरामद हुए हैं। पुलिस ने बरामदगी के आधार पर दोनों मुकदमों में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी की है।
बरामद किए गए सिम कार्ड, मोबाइल फोन और आधार कार्ड को पुलिस ने जांच में शामिल किया है। इनसे जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है, ताकि साइबर ठगी के मामलों में आरोपियों की भूमिका और इस्तेमाल किए गए साधनों के बारे में जानकारी स्पष्ट हो सके।
केवाईसी के नाम पर जानकारी जुटाने का आरोप:
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी दीपक कुमार कथित तौर पर पीओएस एजेंट के रूप में काम करता था। वहीं, विक्रांत सिंह माइक्रो फाइनेंस कंपनी में फील्ड ऑफिसर के तौर पर कार्यरत था।
पुलिस के अनुसार, दोनों मिलकर लोगों को केवाईसी कराने के नाम पर उनके जरूरी दस्तावेज और व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते थे। आरोप है कि बाद में इसी जानकारी का इस्तेमाल लोगों के खातों से रकम निकालने के लिए किया जाता था। पुलिस अब इस पूरे मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच कर रही है।
साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच जारी:
पुलिस दोनों मामलों में गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि बरामद किए गए सिम कार्ड और दस्तावेजों का इस्तेमाल कितने लोगों के साथ कथित साइबर ठगी में किया गया।
इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में आरोपियों के साथ कोई अन्य व्यक्ति जुड़ा हुआ है या नहीं। बरामद सामान और उपलब्ध जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू:
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले में पुलिस द्वारा बरामद सिम कार्ड, मोबाइल फोन और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
साइबर ठगी के दोनों मामलों में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा आरोपियों की भूमिका और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने पर केंद्रित है। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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रिपोर्टर: मोहम्मद अकरम
