Video:हमीरपुर: बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज आंधी के चलते किसानों का हाल हुआ बेहाल!

हमीरपुर (Hamirpur, Uttar Pradesh) में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर बड़ा असर डाला है। बीते दिनों हुई बारिश के कारण खेतों में खड़ी और कटी पड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है। मौसम साफ होने पर किसानों को थोड़ी राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन एक बार फिर मौसम विभाग (IMD) की चेतावनी ने उनकी चिंताओं को बढ़ा दिया है।

मौसम साफ होने से जगी उम्मीदें:
सोमवार को मौसम साफ होने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि खेतों में भीगी पड़ी गेहूं की फसल धीरे-धीरे सूख जाएगी। किसानों का मानना था कि लगभग एक सप्ताह के भीतर खेतों की स्थिति सामान्य हो जाएगी और वे बची हुई फसल की कटाई शुरू कर सकेंगे। लेकिन बदलते मौसम के संकेतों ने उनकी इस उम्मीद को कमजोर कर दिया है।

बारिश की चेतावनी से बढ़ी चिंता:
मौसम विभाग (IMD) ने सात और आठ अप्रैल को बारिश की संभावना जताई थी। इस चेतावनी के बाद किसानों की चिंता फिर से बढ़ गई है। यदि दोबारा बारिश होती है तो खेतों में पड़ी गीली फसल के पूरी तरह खराब होने का खतरा है। इससे किसानों की मेहनत पर और अधिक असर पड़ सकता है।

फसलों को भारी नुकसान का अंदेशा:
लगातार बदलते मौसम के कारण किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पहले से ही वर्षा और ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में गीली पड़ी फसल को देखकर किसानों में निराशा का माहौल है। उनका कहना है कि उनकी मेहनत और उम्मीदें पूरी तरह फसल पर टिकी थीं, लेकिन खराब मौसम ने सारी योजनाओं को प्रभावित कर दिया है।

सब्जी उत्पादकों पर भी असर:
केवल गेहूं ही नहीं, बल्कि सब्जी की खेती करने वाले किसान भी इस प्राकृतिक मार से अछूते नहीं हैं। खेतों में पानी भर जाने के कारण सब्जियां सड़ने की कगार पर पहुंच गई हैं। ओलावृष्टि से कच्ची फसल और पौधों को भी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है।

प्राकृतिक आपदा से बढ़ी मायूसी:
शनिवार शाम और रविवार सुबह हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की परेशानी को और बढ़ा दिया। प्राकृतिक आपदा के चलते अन्नदाताओं के चेहरों पर मायूसी साफ नजर आ रही है। खेतों में खराब हो रही फसल को देखकर किसान गहरी चिंता में हैं और भविष्य को लेकर अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं।

मुआवजे की उठी मांग:
किसानों ने सरकार से मांग की है कि खराब हुई फसलों का सर्वे कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि नुकसान का सही आकलन कर सहायता प्रदान की जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें और आगे की खेती के लिए तैयार हो सकें।

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रिपोर्टर: मोहम्मद अकरम



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