गाजीपुर (Ghazipur) में छात्रनेताओं पर दर्ज मुकदमों और कथित अवैध होटल संचालन के मुद्दे को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला (Anupam Shukla) से मुलाकात की। छात्रनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं के इस प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए छात्रनेताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने तथा अवैध गतिविधियों में संलिप्त बताए जा रहे होटलों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में कई बिंदुओं को रखते हुए मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन:
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला (Anupam Shukla) को बताया कि वर्ष 2023 में दिल्ली (Delhi) की एक नाबालिग युवती से जुड़े एक गंभीर मामले के बाद गाजीपुर (Ghazipur) के कुछ छात्रनेताओं ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि उस समय मामले को संज्ञान में लेते हुए पुलिस द्वारा होटल देव इंटरनेशनल (Dev International) और द सिटी रूम्स (The City Rooms) के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की गई थी।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जांच के दौरान तैयार रिपोर्ट में इन प्रतिष्ठानों से संबंधित कुछ तथ्यों का उल्लेख किया गया था और वर्तमान में इस प्रकरण से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
छात्रनेताओं पर मुकदमे दर्ज होने का आरोप:
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि उक्त मामले में सक्रिय भूमिका निभाने वाले छात्रनेताओं के खिलाफ बाद में लगातार शिकायतें की जाती रहीं। ज्ञापन के अनुसार वर्ष 2023 में भी छात्र नेता दीपक उपाध्याय और शशांक उपाध्याय के खिलाफ आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर जान से मारने और रंगदारी मांगने की शिकायत की गई थी। प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि उस समय सक्षम अधिकारी द्वारा शिकायत को असत्य बताते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इसके बावजूद छात्रनेताओं को विभिन्न मामलों में फंसाने के प्रयास जारी रहे और 10 जून 2026 को गाजीपुर कोतवाली (Ghazipur Kotwali) में शशांक उपाध्याय (Shashank Upadhyay), दीपक उपाध्याय (Deepak Upadhyay), अभिषेक राय (Abhishek Rai) और संदीप राय (Sandeep Rai) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
निष्पक्ष जांच की उठाई मांग:
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के समक्ष यह भी कहा कि जिन छात्रनेताओं पर मुकदमा दर्ज किया गया है, उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। साथ ही ज्ञापन में यह दावा किया गया कि प्राथमिकी में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। दूसरी ओर, प्रतिनिधिमंडल ने कुछ होटल संचालकों के विरुद्ध विभिन्न आरोपों का उल्लेख करते हुए उनके लाइसेंस और संचालन से जुड़े मामलों की भी जांच कराने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि छात्रनेताओं ने एक जागरूक नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाते हुए कथित अवैध गतिविधियों की शिकायत की थी और इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने की मांग की।
विधिक कार्रवाई की मांग पर जोर:
ज्ञापन में छात्रनेताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने तथा कथित अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से कहा कि मामले में न्यायसंगत और निष्पक्ष निर्णय लिया जाए ताकि सभी पक्षों को उचित अवसर मिल सके।
प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर समुचित विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला (Anupam Shukla) ने प्रतिनिधिमंडल को मामले में न्यायोचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
कई लोग रहे मौजूद:
इस अवसर पर अंकित राय (Ankit Rai), प्रवीण दुबे (Praveen Dubey), अमरनाथ राय (Amarnath Rai), देवेश राय (Devesh Rai), ओजस्व साहू (Ojaswa Sahu), अमृतांश बिंद (Amritansh Bind), विकास यादव (Vikas Yadav), निलेश बिंद (Nilesh Bind), विकास तिवारी (Vikas Tiwari), रोशन सिंह (Roshan Singh), प्रकाश राय (Prakash Rai), संतोष कुमार (Santosh Kumar), शिवम (Shivam), राजू पाण्डेय (Raju Pandey), अंकित सिंह (Ankit Singh) और अविनिश सिंह (Avinish Singh) सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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