रिपोर्ट: जफर इकबाल
Ghazipur: करंडा (गाज़ीपुर)। चकिया रामलीला में इस वर्ष रावण वध का ऐतिहासिक दृश्य बारिश के कारण प्रभावित हो गया। आसमान से अचानक हुई बरसात ने न केवल दर्शकों को भीगने पर मजबूर कर दिया बल्कि मंचन और आतिशबाज़ी की तैयारियों पर भी असर डाला। इसके बावजूद आयोजकों ने हर संभव प्रयास किया कि दशहरा का मुख्य आकर्षण अधूरा न रहे।
बरसात में भी हुआ रावण वध:
जब कार्यक्रम के बीच अचानक तेज बारिश शुरू हुई तो मैदान में मौजूद दर्शकों को कठिनाई का सामना करना पड़ा। मंचन की तैयारियां भी प्रभावित हुईं, फिर भी आयोजकों ने परिस्थिति के अनुसार व्यवस्था बनाकर रावण वध का मंचन किसी तरह पूरा किया। दर्शकों का उत्साह देख आयोजन समिति ने कार्यक्रम रुकने नहीं दिया।
आतिशबाज़ी का नज़ारा फीका पड़ा:
बारिश के कारण रावण वध का दृश्य पूरी भव्यता से प्रस्तुत नहीं हो सका। आतिशबाज़ी की चमक और शोर पानी की बूंदों के बीच धुंधला गया। बावजूद इसके, जब भगवान राम का तीर रावण को लगा तो पुतला धराशायी हो गया और चारों ओर से “जय श्रीराम” के नारों की गूंज ने माहौल को रोमांचक बना दिया।
मेले की रौनक पर असर:
बारिश ने केवल रामलीला मंचन ही नहीं बल्कि मेले की रौनक पर भी असर डाला। दुकानदारों को असुविधा का सामना करना पड़ा और कई स्टॉल पर बारिश का पानी भर गया। बच्चों के झूले और अन्य खेल-तमाशे भी कुछ समय के लिए ठप हो गए।
ग्रामीणों का अटूट उत्साह:
हालांकि बारिश ने कार्यक्रम में खलल जरूर डाला, लेकिन ग्रामीणों का उत्साह कम नहीं हुआ। उनका कहना था कि चाहे कितनी भी बाधाएं आएं, दशहरा हर साल की तरह बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश जरूर देता है। इसी आस्था और विश्वास ने इस बार भी रावण वध को सफल बनाया।
जीवन्त रहा विजयादशमी का संदेश:
हालांकि दृश्य उतना भव्य नहीं रहा जितना हर वर्ष होता है, फिर भी विजयादशमी का सार वही रहा। रावण वध के साथ यह संदेश एक बार फिर जीवंत हुआ कि असत्य और अन्याय की हार निश्चित है, और सत्य की सदैव विजय होती है।