गाजीपुर में जुए के अड्डों का जाल, पुलिस कार्रवाई पर सवाल

गाजीपुर और चंदौली में कथित जुए के अड्डों के संचालन को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, वाराणसी के नदेसर स्थित ‘मिंट हाउस’ मामले के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज होने पर जुए के कारोबार से जुड़े चर्चित लोगों के अपने पुराने इलाकों से हटकर दूसरे स्थानों पर सक्रिय होने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि अब जुए का यह कथित कारोबार गाजीपुर और चंदौली के अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, जमानियां, रेवतीपुर, भदौरा, नंदगंज, सैदपुर और करंडा क्षेत्र में बीते करीब एक महीने के दौरान कथित जुए के अड्डों की गतिविधियां बढ़ी हैं। इनमें जमानियां और रेवतीपुर क्षेत्र में गंगा पार के इलाकों को प्रमुख ठिकाने के तौर पर बताया जा रहा है। सूत्रों ने इन गतिविधियों को किशन महाराज नाम के व्यक्ति से जोड़ते हुए कई दावे किए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि दी गई जानकारी में नहीं है।

जमानियां और रेवतीपुर में कथित अड्डों की चर्चा:

सूत्रों के अनुसार किशन महाराज के नाम से जुए के कारोबार को लेकर गाजीपुर के जमानियां और रेवतीपुर क्षेत्र में चर्चा है। दावा किया गया है कि देवरिया क्षेत्र में ‘यादव जी’ नाम से चर्चित व्यक्ति भी कथित तौर पर जुए का अड्डा चला रहा है। इसी के साथ बरबरहना इलाके से जुड़े एक पुराने जुआरी के वहां सक्रिय होने का भी दावा किया गया है।

दी गई जानकारी में यह भी कहा गया है कि करंडा, नंदगंज और महाराजगंज इलाके में अलग-अलग स्थानों पर कथित जुए के अड्डे चलने की चर्चा है। सूत्रों का दावा है कि इन गतिविधियों के बीच किसी न किसी स्तर पर किशन महाराज का नाम सामने आता है। हालांकि, इन दावों को लेकर आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं कराई गई है।

कई जिलों से लोगों के पहुंचने का दावा:

सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि कथित जुए के इन अड्डों पर आसपास के कई जिलों से लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इनमें वाराणसी, बलिया, आजमगढ़, मऊ, जौनपुर और बक्सर के लोगों के पहुंचने की बात कही गई है।

इस तरह के दावों के बीच स्थानीय स्तर पर कथित जुए के संचालन को लेकर निगरानी और कार्रवाई की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, किस स्थान पर किस तरह की गतिविधि संचालित हो रही है और उसमें कौन लोग शामिल हैं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल:

गंगा पार के इलाकों में कथित रूप से चल रहे जुए के अड्डों को लेकर स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों ने पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर संदेह जताया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में इस संबंध में कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं रखा गया है।

इस मामले में जमानियां के क्षेत्राधिकारी Ankit Tiwari (अंकित तिवारी) ने कहा है कि मामला मीडिया के माध्यम से उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अपने कार्यक्षेत्र में किसी भी स्थिति में जुए का अड्डा संचालित नहीं होने दिया जाएगा।

क्षेत्राधिकारी के इस बयान के बाद अब कथित जुए के अड्डों को लेकर पुलिस की जांच और कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

सूदखोरों के नेटवर्क का भी दावा:

सूत्रों ने कथित जुए के अड्डों के साथ गैर लाइसेंसी तरीके से ब्याज पर पैसा देने वाले लोगों की सक्रियता का भी दावा किया है। बताया गया है कि जुए के अड्डों पर हारने वाले लोगों को तत्काल ब्याज पर पैसा उपलब्ध कराने का काम किया जाता है।

दावे के अनुसार, ऐसे लोग बड़ी रकम लेकर कथित अड्डों पर मौजूद रहते हैं और जुए में रकम गंवाने वालों को ब्याज पर पैसा देते हैं। सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि कथित जुए के कारोबार से जुड़े लोगों को स्थान और अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में ऐसे लोगों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पांच दिन में पांच लाख के लक्ष्य का दावा:

सूत्रों के अनुसार किशन महाराज कथित तौर पर अपने एक अड्डे से पांच दिन में पांच लाख रुपये तक कमाने का लक्ष्य लेकर चलता है। दावा है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पहले से ही टीम के लोगों और व्यवस्था को तय किया जाता है।

सूत्रों का कहना है कि जब किसी स्थान पर कथित रूप से तय लक्ष्य पूरा हो जाता है, तभी उस अड्डे को आगे संचालित करने की अनुमति देने की बात कही जाती है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

गाजीपुर और चंदौली में कथित जुए के अड्डों को लेकर सामने आए इन दावों के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण पहलू पुलिस जांच है। स्थानीय पुलिस की ओर से जांच और कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

Disclaimer:

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रिपोर्ट : सऊद अंसारी
ब्यूरो: हसीन अंसारी

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